ख़्वाहिश के शिकारी कुत्ते
मेरा पीछा कर रहे हैं
मेरी बू सूँघते हुए
ज़िंदगी की आख़िरी हद तक
आ गए हैं
अब ख़्वाबों का गहरा ग़ार भी
मुझे बचा नहीं सकता
— Ehtisham Akhtar
मेरा पीछा कर रहे हैं
मेरी बू सूँघते हुए
ज़िंदगी की आख़िरी हद तक
आ गए हैं
अब ख़्वाबों का गहरा ग़ार भी
मुझे बचा नहीं सकता
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