कल भी बारिश हुई थी
आज भी बारिश होगी
और फिर
खोखली अज़्मतें
पैदल चलती सड़कों पर
कीचड़ उछालते हुए
हवा की तरह गुज़र जाएँगी
आरास्ता दूकानें
ये तमाशा देखेंगी
और हँसेंगी
— Ehtisham Akhtar
आज भी बारिश होगी
और फिर
खोखली अज़्मतें
पैदल चलती सड़कों पर
कीचड़ उछालते हुए
हवा की तरह गुज़र जाएँगी
आरास्ता दूकानें
ये तमाशा देखेंगी
और हँसेंगी
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