मिज़ाज-ए-इश्क़ कुछ बदला तुम्हारा हैकिया जो तुम ने अब मुझ से किनारा हैमुझे ये लगता है दिलबर कि उस को अबइलावा मेरे हर इक शख़्स प्यारा है— DILBAR