मुफ़्त में जब बँट रहे थे ज़िन्दगी के मशवरेले रहे थे उस समय हम आशिक़ी के मशवरेऔर भी ज़्यादा मज़ा देने लगी ये ज़िन्दगीआ रहे जब हर तरफ़ से ख़ुद-कुशी के मशवरे— Deva morya 'Raahi'