मैं ने तुम से मोहब्बत करी है सनमनाज़ नख़रे उठाऊँ तो क्या हर्ज हैतुम मेरे हो मेरे हो मेरे बस मेरेतुम को अपना बताऊॅं तो क्या हर्ज है— Krishnavat Ritesh