"आदत"
वो साथ था आबाद था
जैसे तैसे निकला ही था ख़ुद से ख़ुद को पीछे छोड़ कर
पर एक आदत से निकलने के लिए दूसरी आदत डाल ली
डाल ली फिर से आदत कुछ अटपटे से नाम देने की
काम देने की मेरी सुब्ह मेरी शाम देने की
आदत डाल ली फिर से मैं ने
निकाल ली मैं ने वो पोशाकें जो कभी दोबारा नहीं पहनने का मन बनाया था
तन नहीं सजाया था सालों से मैं ने
अरसे बीत गए थे ख़ुद को दूसरे की आँखों के पानी में देखे
पर फिर भी आदत डाल ली मैं ने
फिर से कुछ केशों को गालों पर सजाने की
फिर से इस सीने की इक तकिया बनाने की
फिर से अक्सर रात में घर देर जाने की
ग़लतियाँ सारी किसी की भूल जाने की
आदत डाल ली फिर से















