
मेरी संतान से मेरा अलग दुर्लभ ही नाता है
उसे इक मैं मुझे इक वो हमेशा से ही भाता है
लिखूँ तो काव्य उस का नाम गाऊंँ तो तराना है
वो मुझ से ही मुझे हर रोज़ आ कर के मिलाता है
— Aniket sagar
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