"श्याम की याद"

नंद के लाल यशोदा के दुलारे मोहन
हम तिरी याद में बेताब हैं सारे मोहन
रोते रोते हुई भगतों की तिरे उम्र बसर
किस मुसीबत में शब-ओ-रोज़ गुज़ारे मोहन
नाम-लेवा तिरे दुनिया से मिटे जाते हैं
जाँ-ब-लब हैं तिरी आँखों के सितारे मोहन
जिस को करता था कलेजे से घड़ी भर न जुदा
छोड़ रखा है उसे किस के सहारे मोहन
फिर वही साँवली छब आए नज़र भगतों को
नंद की गोद में जमुना के किनारे मोहन
नंद बाबा की कुटी हो गई सूनी तुझ बिन
फीके मथुरा के हुए सारे नज़ारे मोहन
दर्द-मंदों को कलेजे से लगाने वाले
'आफ़्ताब' आज मुसीबत में पुकारे मोहन

— Aaftab Rais Panipati

More by Aaftab Rais Panipati

Other nazm from the same pen

See all from Aaftab Rais Panipati →

Aankhein Shayari

Shers of aankhein.

All Aankhein Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling