जहाँ से
हुआ था
शुरूअ'
सफ़र
देखा वहाँ कोई नहीं था
सामने था
मुंतज़िर सहरा सफ़र का
और साए ख़ार-दार
देखते रुकते ठीक वैसे ही
जो मेरे आगे के पाएदानों पर खड़े
सायों ने
सोचा चाहा और किया
मैं जो उन का पेश-रौ हूँ
— Aadil Raza Mansoori
हुआ था
शुरूअ'
सफ़र
देखा वहाँ कोई नहीं था
सामने था
मुंतज़िर सहरा सफ़र का
और साए ख़ार-दार
देखते रुकते ठीक वैसे ही
जो मेरे आगे के पाएदानों पर खड़े
सायों ने
सोचा चाहा और किया
मैं जो उन का पेश-रौ हूँ
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