इस के हरे रहने
सूखने
झड़ने से
फ़र्क़ कुछ पड़ता नहीं है
पेड़ को
क्या इसी ग़म में
घुल जाता है
पत्ता
— Aadil Raza Mansoori
सूखने
झड़ने से
फ़र्क़ कुछ पड़ता नहीं है
पेड़ को
क्या इसी ग़म में
घुल जाता है
पत्ता
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