बजा है कि
बारिशों से पहले भी
उदास था जंगल
और अब भी है
जब हो चुकी है
बारिश
लगता है
ठहर गया है
मौसम अंदर का
हो गई है
जामिद
समाअ'त और बसारत
देखते सुनते हुए भी जो
नज़र आता नहीं है
बदलाओ
— Aadil Raza Mansoori
बारिशों से पहले भी
उदास था जंगल
और अब भी है
जब हो चुकी है
बारिश
लगता है
ठहर गया है
मौसम अंदर का
हो गई है
जामिद
समाअ'त और बसारत
देखते सुनते हुए भी जो
नज़र आता नहीं है
बदलाओ
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