हम काट लेंगे हिज्र की ये रातें भीपहले मोहब्बत भी ज़रा हो तो सहीहै मुख़्तलिफ़ मेरी कहानी औरों सेतुम दर्द-ए-दिल को मेरे समझो तो सही— Shams Amiruddin