ज़िन्दगी को हसीं एक इन'आम दूँसोचता हूँ मोहब्बत इसे नाम दूँहो मिरे घर में औलाद जुड़वाँ अगरनाम इक को अली, दूजे को राम दूँ— Dipanshu Shams