"पेड़"
सत्रह अठराह साल की थी वो
जब वो दुनिया छोड़ गई थी
आख़िरी साँसें गिनती लड़की
मुझ से हिम्मत बाँट रही थी
हाथ पकड़ के डाँट रही थी
ऐसे थोड़ी करते हैं
आशिक़ थोड़ी मरते हैं
जिस्म तो एक कहानी है
साँसें आनी जानी हैं
उस ने कहा था प्यारे लड़के
सब से मिलना हँस के मिलना
मेरी याद में पेड़ लगाना
पागल लड़के इश्क़ के हामी
मेरे पीछे मर मत जाना
इश्क़ किया था इश्क़ निभाना
— Rishabh Sharma















