फूलों के नाज़ुक शानों पर है ख़ुश्बूवैसे तो ये तेरी ज़िम्मेदारी हैअर्सा गुज़रा है सहरा में हम को परमहक अभी तक दोशीज़ा की तारी है— Navneet Vatsal Sahil