"इक ख़याल हक़ीक़त से बे-रब्त"
बहुत देर हुई मैं एक ख़याल में गुम हूँ
ख़याल भी क्या है
बस इक ख़याल है
हैरत है बहुत देर हुई
पर मैं अभी तलक गुम हूँ
उसी ख़याल में
जो बस इक ख़याल है
— Navneet Vatsal Sahil
बहुत देर हुई मैं एक ख़याल में गुम हूँ
ख़याल भी क्या है
बस इक ख़याल है
हैरत है बहुत देर हुई
पर मैं अभी तलक गुम हूँ
उसी ख़याल में
जो बस इक ख़याल है
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