"हौसला"
हौसला रख रास्ते दिखने लगेंगे
ये अँधेरे सुब्ह तक छटने लगेंगे
क़ाफ़िले पर क़ाफ़िले गुज़रे यहाँ से
देखना कुछ नक़्श-ए-पा आगे मिलेंगे
लड़-खड़ाते हौसलों को फिर उठा कर
सुब्ह होते ही सफ़र पर चल पड़ेंगे
ठोकरों से कह दो के दम-ख़म लगा दें
हम गिरेंगे फिर उठेंगे पर चलेंगे
— MAHESH CHAUHAN NARNAULI















