
मैं समझता था सरल है ज़िन्दगी बस फ़िल्म जितनी
डर गया मैं ज़िन्दगी की फिर हक़ीक़त को समझ कर
ऐंठ से आया था बाज़ार-ए-मुहब्बत में कभी जो
रह गया वो लड़का जानाँ ज़ुल्फ़ में तेरी उलझ कर
— Kartik tripathi
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