"लिमिट"

कोई आबाद सितारे की कोई हद हो तो
वो सितारा किसी तस्वीर में होगा
आसमाँ में नहीं हो सकता
और उस आसमाँ का
कोई भी फ़्रेम नहीं होता
होगा भी कैसे?
उस के पेंटर ने उसे ऐसे बनाया है
जैसे कमरे की कोई छत है
जिस पे तारों के डिज़ाइन बने है
और वो सारे डिज़ाइन
शाम के बा'द नज़र आते है
जिन को सब तोड़ने की क़स
में भी खाते हैं
और वो सारी की सारी
क़स
में झूठी हैं
क्या कोई फूलों के रंगों को मिटा पाया है
क्या किसी ख़्वाब ने
सच दिखाया है
या किसी बे-वफ़ा ने सच्ची मोहब्बत की हो
या गुलाबों ने भी इज़हार किया हो
आदमी, आदमी से प्यार किया हो
या कभी पानी को पानी में
डूबते देखा हो
और तब पानी में
उस सितारे की सभी रातों की हद क्या है?
तुम बताओ मिरी इन बातों की हद क्या है?
या मिरी बातें भी
उन सितारों की तरह ही किसी
फ़्रेम का हिस्सा है?

— Ajay Kumar

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