
एक तस्वीर जो बन आती है बीनाई में
याद बस उस को ही करता हूँ मैं तन्हाई में
हम को अब जाके ये मालूम हुआ है यारों
कितना कुछ होता है इक शख़्स की परछाई में
— Kumar gyaneshwar
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