
उन की औक़ात से बाहर वो नज़र आता है
जिन के शे'रों में हुआ करता है गहराई का माल
ऐसे लोगों पे निगाहें मैं सदा रखता हूँ
जिन की जेबों में भरा रहता है सप्लाई का माल
— Dard Faiz Khan
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