
ये खाना खा नहीं सकता, ये पानी पी नहीं सकता
बिना तेरे, तो ये बेचैन आशिक़ जी नहीं सकता
ये अपनी साँस, तेरी उन नरम बाँहों में तोड़ेगा
किसी भी दूसरे रस्ते से ये मर ही नहीं सकता
— Sarthak Bechen
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