
ख़ूब-सूरत है चमन वो जिस चमन में तितलियाँ हैं
दोस्त जन्नत जैसा है घर जिस भी घर में बेटियाँ हैं
है उदासी बस इसी की एक भाई को कि 'आरिज़'
क्यूँ लिखीं तक़दीर में बहनों से इतनी दूरियाँ हैं
— Azhan 'Aajiz'
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