जहाँ कैसे हुआ रौशन ये कैसा फ़लसफ़ा है देख
ये किस की आँख का तारा फ़लक से जा लगा है देख
ये किस की आँख का तारा फ़लक से जा लगा है देख
ये कैसे जी रहे हैं हम है कैसी ज़िंदगी अपनी
किसी का कुछ बिगाड़ा या किसी की बद-दुआ है देख
सभी ने कर दिया मुझ को नज़र-अंदाज़ जाने क्यूँ
सभी की आँख में अटका हुआ हूँ क्या किया है देख
जो भी गुम हो गया था कल वो अबतक लौट आया है
कहाँ नाराज़ होते हो किधर वो खो गया है देख
यही समझा नहीं अबतक किया सबपे भरोसा क्यूँ
सभी ने तोड़ डाला फिर से मेरा हौसला है देख
हमारे फूल पर ये सब कहाँ से तितलियाँ आई
हमारे दिल के आँगन को भी कब्ज़ा क्यूँ किया है देख
नहीं आराम अपना है नहीं है दिल-लगी अपनी
रखो तुम हर ख़ुशी अपनी हमें ग़म मिल गया है देख
किसी से हारने का ग़म हमें होता नहीं है अब
सभी को जीतना होगा मुझे तो हारना है देख
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कोई समझता ही नहीं हाल-ए-दिल क्या करें
शहर का शहर हैं यहाँ क़ातिल क्या करें
शहर का शहर हैं यहाँ क़ातिल क्या करें
सफ़र-ए-ज़िन्दगी गुज़र गई एक सफ़र में
अब मिल भी जाए तो मंज़िल क्या करें
दोस्ती की मुहब्बत की सुकूँ से जीने के लिए
सुकून फिर भी न मिले तो आदमीं क्या करे
एक पल भी मुझे जीने लाइक़ तो मिले
जीने लायक़ ही नहीं तो ज़िन्दगी क्या करे
मेरे दोस्त दोस्ती के बदलें में दोस्ती न कर
जब तक दिल न मिलें कोई दोस्ती क्या करे
तू कहें तो जीना छोड़ दे उठ जाए मौत से
तू ही बता तेरे ख़ातिर हम और क्या करे
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इश्क़ के अलावा हैं तुझे कई और भी काम
कैसी आशिक़ी हैं तुझे तो मर जाना चाहिए
कैसी आशिक़ी हैं तुझे तो मर जाना चाहिए
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