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उस को दिल में बिठा कर इल्म हुआ है यारों
नूर आँखों का नहीं बढ़ता फ़क़त काजल से
नूर आँखों का नहीं बढ़ता फ़क़त काजल से
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दुनिया वालों कुछ तो क़िस्तें भेजो ग़म के मेरे घर
मेरा दुख कम पड़ रहा है शा'इरी के वास्ते
मेरा दुख कम पड़ रहा है शा'इरी के वास्ते
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कब तक रखती वो भी आख़िर दिल हम जैसे प्यादों का
बचपन से ही सपना देखा हो जिस ने शहज़ादों का
बचपन से ही सपना देखा हो जिस ने शहज़ादों का
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