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Banne Miyan Jauhar

Top 10 of Banne Miyan Jauhar

Banne Miyan Jauhar

Top 10 of Banne Miyan Jauhar

    शक्ल है मेरी जैसे कटोरा
    या कोई चाँदी का गोला
    रंग है मेरा गोरा गोरा
    अँधेरी शब का मैं हूँ उजाला
    मेरा उजाला हर जा फैला
    बाग़ हो बस्ती या हो सहरा
    चाहती है मुझ को सब दुनिया
    घर घर है मेरा ही चर्चा
    मुझ से बहलता है जी सब का
    छोटा बच्चा हो या बूढ़ा
    हैं आकाश पे जितने तारे
    हैं ये सब मेरे ही प्यारे
    मेरी चमक के आगे देखी
    रौशनी है इन सब की फीकी
    हक़ ने इतना रुत्बा बढ़ाया
    मैं ने ऊँचा दर्जा पाया
    तुम ऐ भोले भाले लड़को
    देखो मुझ को और सबक़ लो
    फ़ाएदा तुम भी कुछ पहुँचाओ
    जियो तो काम सभों के आओ
    गीत तुम्हारे गाएगी दुनिया
    होगा तुम्हारा हर-जा चर्चा
    हक़ है 'जौहर' का ये कहना
    काम आना जब तक भी रहना
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    Banne Miyan Jauhar
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    सुब्ह हुई और अँधेरी भागी
    हक़ की ख़िल्क़त सारी जागी
    फूलों से सब बाग़ हैं महके
    और पखेरू उठ कर चहके
    कुकड़ूँ कूँ है मुर्ग़ के लब पर
    फज्र हुई कहता है घर घर
    झिलमिल झिलमिल कर के तारे
    दिल को लुभा लेते थे प्यारे
    लेकिन वो बे-चारे सिधारे
    जो थे फ़लक पर चाँद सितारे
    सुब्ह को जाते रात को आते
    अपनी झलक हैं हम को दिखाते
    बस यही उन का काम है बच्चो
    इन तारों से तुम भी सबक़ लो
    जो कुछ भी हैं काम तुम्हारे
    मत घबराओ उन के मारे
    तुम को भी है यूँ ही चमकना
    देखो काम से तुम मत थकना
    दुनिया में तुम इज़्ज़त पाना
    दौलत पाना शोहरत पाना
    काम वो करना नाम हो जिस से
    हासिल कुछ इनआ'म हो जिस से
    सस्ती ग़फ़्लत छोड़ो भाई
    इस से किस ने इज़्ज़त पाई
    इल्म का है दुनिया में उजाला
    इस से पड़े जब तुम को पाला
    मेहनत करना जी को लगाना
    आलिम बन कर इज़्ज़त पाना
    क़ौम-ओ-वतन की करना ख़िदमत
    है यही दौलत है यही राहत
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    Banne Miyan Jauhar
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    मैं हूँ चहकने वाली बुलबुल
    मेरे लिए ही खिलते हैं गुल
    गीत सुनाती हूँ फूलों को
    गले लगाती हूँ फूलों को
    आवाज़ ऐसी सुरीली पाई
    मेरी बोली सब को भाई
    दम फूलों का भरती हूँ मैं
    फूलों पर ही मरती हूँ मैं
    मेरे लय हर इक को भाई
    ख़ुश है मुझ से सारी ख़ुदाई
    शाइ'र हैं मशरिक़ में जितने
    गुन गाते हैं सब ही मेरे
    ज़ाहिर में हूँ छोटी लेकिन
    सारा चमन सूना है मुझ बिन
    लड़को तुम तो ख़ुद हो दाना
    भेद ये क्या अब तुम को बताना
    मेरी सदा दिलकश है जो इतनी
    बात बड़ी इस में नहीं कोई
    दी है ये ने'मत मुझ को ख़ुदा ने
    मोह लिए दिल मेरी सदा ने
    कौन ख़ुदा वो सब का मौला
    जिस ने इस दुनिया को बनाया
    मेंह बरसाया पौदे उगाए
    रंग-बिरंगे फूल खिलाए
    जिन की भीनी भीनी बू से
    जंगल महके गुलशन महके
    है वो दो-आलम का रखवाला
    कहते हैं जिस को बारी-तआ'ला
    हम सब का मालिक वो ख़ुदा है
    माँ बाप और भाई से सिवा है
    गाती हूँ गीत उस के हर दम
    जिस ने बनाया है ये आलम
    गीत उसी के तुम भी गाओ
    अपने रब को भूल न जाओ
    'जौहर' फिर दुनिया है तुम्हारी
    सुनता है सब कुछ वो हमारी
    फ़ज़्ल ख़ुदा का जब हो जाए
    जो माँगे इंसान वो पाए
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    Banne Miyan Jauhar
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    बच्चो निज़ाम-उल-मुल्क वज़ीर
    दानाई की था तस्वीर
    उस से मिलने को सदहा
    आते थे अदना आ'ला
    अच्छी जगह पर बिठलाता
    और मोहब्बत फ़रमाता
    इक बूढ़ा आता हर दिन
    हद से ज़ियादा जिस का सिन
    लोगों ने उस से पूछा
    आता क्यूँ है ये बुढ्ढा
    करते हो क्यूँ उस की इज़्ज़त
    इस बुड्ढे की ये अज़्मत
    बोला उन सब से ये वज़ीर
    है अच्छा तुम से ये फ़क़ीर
    तुम तो ख़ुशामद करते हो
    मेरी ख़ुशी पर मरते हो
    लेकिन ये बुढ्ढा दाना
    मेरे ऐब है बतलाता
    दोस्त ये है मेरा असली
    माना हूँ हर बात इस की
    इस को न दुश्मन जानो तुम
    मेरा कहना मानो तो तुम
    दोस्त वही है ऐ 'जौहर'
    बात कहे सच्ची मुँह पर
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    Banne Miyan Jauhar
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    है ज़बाँ पर सब की मिदहत इल्म की
    क्यूँ न हो दिल में मोहब्बत इल्म की
    क्यूँ न हो हर इक को चाहत इल्म की
    हर किसी को है ज़रूरत इल्म की
    इल्म के रुत्बे से वाक़िफ़ है जहाँ
    गोशे गोशे में है शोहरत इल्म की
    जिस को चसका लग गया है इल्म का
    पूछिए उस से हक़ीक़त इल्म की
    बस उसी ने पाई इज़्ज़त मुल्क में
    दिल से की है जिस ने ख़िदमत इल्म की
    सारे दुनिया का चहीता है ये इल्म
    रहती है हर दिल में उल्फ़त इल्म की
    वो ज़लील-ओ-ख़्वार दुनिया में हुआ
    जिस किसी ने की न इज़्ज़त इल्म की
    दो जहाँ की उस को ने'मत मिल गई
    हो गई जिस पर इनायत इल्म की
    सुर्ख़-रू होता है वो इक दिन ज़रूर
    रहती है जिस दिल को चाहत इल्म की
    तख्त-ए-शाही क्या है मिलता है ख़ुदा
    इस से बढ़ कर क्या हो बरकत इल्म की
    क्यूँ किसी के आगे वो फैलाए हाथ
    हाथ आई जिस के दौलत इल्म की
    है ये कुंजी ऐश और आराम की
    क्या बताऊँ क़द्र-ओ-क़ीमत इल्म की
    सारी दुनिया पा रही है जिस से फ़ैज़
    है हक़ीक़त में वो दौलत इल्म की
    जान से इस को समझते हैं अज़ीज़
    जिन पे रौशन है हक़ीक़त इल्म की
    हो वो बच्चा या हो बूढ़ा या जवान
    हर किसी को है ज़रूरत इल्म की
    जाओ 'जौहर' हर कहीं बे-ख़ौफ़ तुम
    कोई लूटेगा न दौलत इल्म की
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    Banne Miyan Jauhar
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    तुम ने देखा होगा घोड़ा
    क्या सीना उस का है चौड़ा
    शक्ल है प्यारी वो है बाँका
    काठी अच्छी रंग भी अच्छा
    बाल उस की दम और गर्दन के
    क्या हैं मुलाएम और चमकीले
    गोल क़दम हैं टाँगें पतली
    रानें ताक़त-वर और चिपटी
    ना'ल अगर हों सुम नहीं घिसते
    दौड़ते हैं आराम से घोड़े
    सुम हैं सख़्त कुछ ऐसे बच्चो
    काटें तो ईज़ा न हो उस को
    कान हैं छोटे खड़े नुकीले
    दाँत हैं मुँह में आगे पीछे
    घास चना बस इस की ग़िज़ा है
    चबा चबा कर ये खाता है
    तेज़ है इतना दौड़ने वाला
    दम कई मीलों में है लेता
    अक़्ल समझ अच्छी है इस की
    और वफ़ा भी इस में पाई
    रखता है ये याद वो रस्ता
    इस ने जो इक बार भी देखा
    ताबे' अपने मालिक का है
    उस के इशारे पर चलता है
    रंज में आक़ा को जो है पाता
    अपनी जान को भी है खपाता
    तुम भी सबक़ लो इस से बच्चो
    अपने बड़ों को राज़ी रक्खो
    जो कहता है 'जौहर' मानो
    इस की बात को झूट न मानो
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    Banne Miyan Jauhar
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    बच्चो इक दिन नबी हमारे
    मए सहाबा सफ़र को निकले
    वक़्त पकाने का जब आया
    सभों ने अपना हाथ बढ़ाया
    ज़ब्ह किसी ने कर ली बकरी
    किसी ने फ़ौरन खाल निकाली
    इक इक काम किया हर इक ने
    काम हुए यूँ पूरे सारे
    मगर रहा लकड़ी का लाना
    आप ने चाहा जंगल जाना
    आप को हर साथी ने रोका
    किसी का लेकिन कहा न माना
    और जंगल को आप सिधारे
    लाए उठा कर नबी हमारे
    देख के अख़्लाक़ उन के प्यारे
    ख़ुश हुए साथी आप के सारे
    'जौहर' तुम भी याद ये रखो
    यकसाँ समझो हर इंसाँ को
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    Banne Miyan Jauhar
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    तुम ने क्या देखा है तोता
    रंग हरा है प्यारा प्यारा
    मुड़ी हुई है चोंच सिरे पर
    रंगत उस की लाल है ख़ुश-तर
    दुम लंबी और हरे हरे पर
    जाता है हर जा ये उड़ कर
    पतली सी टहनी के ऊपर
    बैठता है ये तोता चढ़ कर
    जहाँ भी है ये आता जाता
    उम्दा उम्दा मेवे खाता
    इस में हैं गुन प्यारे सारे
    सब हैं इस के चाहने वाले
    प्यारी बातें हैं ये सुनाता
    दिल का सब दुख है ये मिटाता
    तुम भी समझ लो ये ऐ लड़को
    जो उस्ताद बताए सीखो
    काम करो तुम ऐसे प्यारे
    घर भर के हो जाओ दुलारे
    सारी दुनिया तुम को चाहे
    गीत तुम्हारे घर घर गाय
    वर्ना तुम्हारी दुर्गत होगी
    सब को तुम से नफ़रत होगी
    'जौहर' की इस बात को मानो
    दोस्त उसे तुम अपना जानो
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    Banne Miyan Jauhar
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    तुझ से महका सारा गुलशन
    तुझ से बना है प्यारा गुलशन
    भीनी भीनी तेरी निकहत
    प्यारी प्यारी तेरी रंगत
    जंगल में है तुझ से मंगल
    जलसों में है तुझ से हलचल
    नाज़िश गुलशन तेरी हस्ती
    तुझ से है बुलबुल की मस्ती
    तेरा दम भरती है बुलबुल
    तेरे लिए है फिरती मरती
    तेरे लिए ही बन से आई
    बाग़ में अपनी बस्ती बसाई
    तेरे लिए ही बाग़ में चहकी
    तेरे लिए ही भटकी बहकी
    बाद-ए-सहर के झोंके से तू
    खिल कर फैला देता है बू
    जिस दम फैली तेरी ख़ुशबू
    दौड़ गई गुलशन से हर सू
    शाख़ में कैसा फूल रहा है
    कितनी ख़ुशी से झूल रहा है
    मस्त हुई है सारी ख़िल्क़त
    फैली है तेरी जो निकहत
    रंग है तेरा कैसा प्यारा
    शाद हुआ हर ग़म का मारा
    देखते ही हर ग़मगीं तुझ को
    भूला अपने दर्द और दुख को
    दुनिया भर का तू है चहीता
    शक नहीं इस में कोई असलन
    तुझ से महकी सारी ज़मीं है
    लेकिन तुझ को नाज़ नहीं है
    तुझ को चाहे सारी दुनिया
    तेरी है हर दिल में तमन्ना
    फूल सिखाता है ये 'जौहर'
    ख़ुश रहो तुम भी यूँ ही दिन भर
    तुम भी ख़ुश हर एक को रक्खो
    मज़ा मोहब्बत का भी चक्खो
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    Banne Miyan Jauhar
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    खेत में चंद मुर्ग़ियाँ हम-सिन
    चुग रही थीं ख़ुशी ख़ुशी इक दिन
    और दो मुर्ग़े ऐसे नज़र आए
    लड़ रहे थे जो एक भुट्टे पर
    इतने में इक तीसरा मुर्ग़ा
    आ के चुपके से भुट्टा ले भागा
    रह गए दोनों हो के वो ख़ामोश
    और दोनों को आया अब ये होश
    हम न लड़ते तो करते क्यूँ नुक़सान
    सच तो ये है कि हैं बड़े नादान
    अब जो पछताए फ़ाएदा क्या है
    फूट का बस यही नतीजा है
    इस से मा'लूम हो गया लड़को
    दो लड़ें तीसरे का अच्छा हो
    मिल के रहने से काम होता है
    यही दस्तूर कुल जहाँ का है
    और लड़ते रहे अगर बाहम
    पा नहीं सकते फ़ाएदा कुछ हम
    याद रक्खो ये बात 'जौहर' की
    ये उड़ाता नहीं है बे-पर की
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    Banne Miyan Jauhar
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Vineet AashnaVineet AashnaAnand Narayan MullaAnand Narayan MullaMehshar AfridiMehshar AfridiGulzarGulzarAkhtar ShumarAkhtar ShumarShahzad AhmadShahzad AhmadUmmeed FazliUmmeed FazliMahboob KhizanMahboob KhizanFiraq GorakhpuriFiraq GorakhpuriAkhtar Saeed KhanAkhtar Saeed Khan