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Akhtar Hoshiyarpuri

Top 10 of Akhtar Hoshiyarpuri

Akhtar Hoshiyarpuri

Top 10 of Akhtar Hoshiyarpuri

    क्या लोग हैं कि दिल की गिरह खोलते नहीं
    आँखों से देखते हैं मगर बोलते नहीं
    Akhtar Hoshiyarpuri
    10
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    'अख़्तर' गुज़रते लम्हों की आहट पे यूँ न चौंक
    इस मातमी जुलूस में इक ज़िंदगी भी है
    Akhtar Hoshiyarpuri
    9
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    इक नूर था कि पिछले पहर हम-सफ़र हुआ
    मुझ को क़बा का चाक ही चाक-ए-सहर हुआ

    सैलाब उमँड के शहर की गलियों में आ गए
    लेकिन ग़रीब-ए-शहर का दामन न तर हुआ

    ज़िंदान-ए-आरज़ू में नज़र बे-बसर रही
    दीवार दर हुई तो किरन का गुज़र हुआ

    वो आँधियाँ चली हैं कि अश्जार उखड़ गए
    दुक्कान-ए-शीशागर पे न फिर भी असर हुआ

    अब कौन देखता फिरे क्यूँ बाम-ओ-दर जले
    जो कुछ हुआ है फ़स्ल-ए-चमन से उधर हुआ
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    Akhtar Hoshiyarpuri
    8
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    ख़्वाब-महल में कौन सर-ए-शाम आ कर पत्थर मारता है
    रोज़ इक ताज़ा काँच का बर्तन हाथ से गिर कर टूटता है

    मकड़ी ने दरवाज़े पे जाले दूर तलक बुन रक्खे हैं
    फिर भी कोई गुज़रे दिनों की ओट से अंदर झाँकता है

    शोर सा उठता रहता है दीवारें बोलती रहती हैं
    शाम अभी तक आ नहीं पाती कोई खिलौने तोड़ता है

    अव्वल-ए-शब की लोरी भी कब काम किसी के आती है
    दिल वो बचा अपनी सदा पर कच्ची नींद से जागता है

    अंदर बाहर की आवाज़ें इक नुक़्ते पर सिमटी हैं
    होता है गलियों में वावेला मेरा लहू जब बोलता है

    मेरी साँसों की लर्ज़िश मंज़र का हिस्सा बनती है
    देखता हूँ मैं खिड़की से जब शाख़ पे पत्ता काँपता है

    मेरे सिरहाने कोई बैठा ढारस देता रहता है
    नब्ज़ पे हाथ भी रखता है टूटे धागे भी जोड़ता है

    बादल उठे या कि न उठे बारिश भी हो या कि न हो
    मैं जब भीगने लगता हूँ वो सर पर छतरी तानता है

    वक़्त गुज़रने के हम-राह बहुत कुछ सीखा 'अख़्तर' ने
    नंगे बदन को किरनों के पैराहन से अब ढाँपता है
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    Akhtar Hoshiyarpuri
    7
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    दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो
    वो नज़र राज़ है उस राज़ का चर्चा न करो

    वुसअ'त-ए-दश्त में दीवाने भटक जाते हैं
    दोस्तो आहु-ए-रम-ख़ुर्दा का पीछा न करो

    तुम मुक़द्दर का सितारा हो मिरे पास रहो
    तुम जबीन-ए-शब-ए-नमनाक पे उभरा न करो

    पस-ए-दीवार भी दीवार का आलम होगा
    तुम यूँही रौज़न-ए-दीवार से झाँका न करो

    घर पलट आने में आफ़ियत-ए-जाँ है यारो
    जब हवा तेज़ चले राह में ठहरा न करो

    या दिल-ओ-दीदा को तनवीर-ए-मोहब्बत बख़्शो
    या दम-ए-सुब्ह ज़माने में उजाला न करो

    ये जहान-ए-गुज़राँ हाथ किसे आया है
    पीछे मुड़ मुड़ के किसी शख़्स को देखा न करो

    भागते लम्हे को कब रोक सका है कोई
    वो तो इक साया है साए की तमन्ना न करो

    सर सलामत नहीं रहते हैं ज़बाँ कटती है
    पत्थरों को कभी भूले से भी सज्दा न करो

    प्यास बुझती है कहाँ तपते बयाबानों की
    मिरी आँखों मिरी आँखों यूँही बरसा न करो

    ज़ीस्त है तेज़-क़दम आगे निकल जाएगी
    तुम किसी मोड़ पे रुकने का इरादा न करो

    कुछ इधर साए हैं जो बढ़ के लिपट जाते हैं
    'अख़्तर' इस राह से हो कर कभी गुज़रा न करो
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    Akhtar Hoshiyarpuri
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    शिकारी रात भर बैठे रहे ऊँची मचानों पर
    मुसाफ़िर फिर भी लौट आने को जा पहुँचे ठिकानों पर

    किसी ने झाँक कर देखा न बाहर ही कोई आया
    हवा ने उम्र भर क्या क्या न दस्तक दी मकानों पर

    ख़ुद अपना अक्स-ए-रुख़ है जो किसी को रोक ले बढ़ कर
    वगर्ना आदमी कब मुस्तक़िल ठहरा चटानों पर

    उठाए आसमाँ के दुख भी किस में इतनी हिम्मत है
    ज़मीं ही एक भारी है हमें तो अपनी जानों पर

    दरीचों ने ये मंज़र आज पहली बार देखा है
    कि तुम जाने कहाँ थे और सूरज था मकानों पर

    घरों से जब निकल आए तो सब ने राह ली अपनी
    मगर दुनिया की नज़रें हैं परिंदों की उड़ानों पर

    हवा यूँ ही तो हम को ले के पेड़ों तक नहीं आई
    हमारा नाम था लिक्खा हुआ गंदुम के दानों पर

    ये माना आँधियों का हक़ है सब पर यूरिशें करना
    मगर ये मैं कि मेरी आँख है ख़स्ता मकानों पर

    कुछ इतने हो गए मानूस सन्नाटों से हम 'अख़्तर'
    गुज़रती है गिराँ अपनी सदा भी अब तो कानों पर
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    Akhtar Hoshiyarpuri
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    न जब कोई शरीक-ए-ज़ात होगा
    मिरा हम-ज़ाद मेरे साथ होगा

    घरों के बंद दरवाज़ों में रौशन
    वही इक ज़ख़्म-ए-एहसासात होगा

    न यूँ दहलीज़ तक आओ कि बाहर
    गली में फ़ितना-ए-ज़र्रात होगा

    कुरेदे जाओ यूँ ही राख दिल की
    कहीं तो शो'ला-ए-जज़्बात होगा

    दरीचे यूँ तो खुल सकते नहीं थे
    हवाओं में किसी का हात होगा

    किताबों में मिलेंगे शे'र मेरे
    मिरा ग़म रौनक़-ए-सफ़्हात होगा

    यही दिन में ढलेगी रात 'अख़्तर'
    यही दिन का उजाला रात होगा
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    Akhtar Hoshiyarpuri
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    शाख़ों पे ज़ख़्म हैं कि शगूफ़े खिले हुए
    अब के फ़रोग़-ए-गुल के अजब सिलसिले हुए

    ख़ुर्शीद का जमाल किसे हो सका नसीब
    तारों के डूबते ही रवाँ क़ाफ़िले हुए

    अपना ही ध्यान और कहीं था नज़र कहीं
    वर्ना थे राह में गुल-ओ-ग़ुंचे खिले हुए

    तुम मुतमइन रहो कि न देखें न कुछ कहें
    आँखों के साथ साथ हैं लब भी सिले हुए

    माना किसी का दर्द ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं
    फिर भी किसी के दर्द से क्या क्या गिले हुए

    जो साँस आ के मस हुए वो मंज़िलें नहीं
    लम्हे जो हम पे बीत गए फ़ासले हुए

    'अख़्तर' मुझे ये डर है कि दामन न जल उठे
    पाता हूँ आँसुओं में शरारे मिले हुए
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    Akhtar Hoshiyarpuri
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    दर-ओ-दीवार पे इक साया पड़ा है देखो
    मेरे रस्ते में कोई जैसे खड़ा है देखो

    ज़र्रा-ए-ख़ाक को सर पर लिए फिरती है हवा
    और पत्थर कि ज़मीं में ही गड़ा है देखो

    इस क़दर भीड़ है रस्ते में कि चलना है मुहाल
    और बादल कि अभी सर पे खड़ा है देखो

    अपनी ही ज़ात के साए में छुपा बैठा हूँ
    कि मिरा साया भी तो मुझ से बड़ा है देखो

    मौज-ए-दरिया को समुंदर से मफ़र मुश्किल है
    लौट भी आओ कि ये रस्ता कड़ा है देखो

    कोई तो आए मुझे आ के बचाए इस से
    मेरी दहलीज़ पे इक शख़्स खड़ा है देखो

    सर पे तूफ़ान भी है सामने गिर्दाब भी है
    मेरी हिम्मत कि वही कच्चा घड़ा है देखो

    सर कटा कर भी खड़ा हूँ सर-ए-मैदाँ अख़्तर
    इस तरह जंग यहाँ कौन लड़ा है देखो
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    Akhtar Hoshiyarpuri
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    आँधी में चराग़ जल रहे हैं
    क्या लोग हवा में पल रहे हैं

    ऐ जलती रुतो गवाह रहना
    हम नंगे पाँव चल रहे हैं

    कोहसारों पे बर्फ़ जब से पिघली
    दरिया तेवर बदल रहे हैं

    मिट्टी में अभी नमी बहुत है
    पैमाने हुनूज़ ढल रहे हैं

    कह दे कोई जा के ताएरों से
    च्यूँटी के भी पर निकल रहे हैं

    कुछ अब के है धूप में भी तेज़ी
    कुछ हम भी शरर उगल रहे हैं

    पानी पे ज़रा सँभल के चलना
    हस्ती के क़दम फिसल रहे हैं

    कह दे ये कोई मुसाफिरों से
    शाम आई है साए ढल रहे हैं

    गर्दिश में नहीं ज़मीं ही 'अख़्तर'
    हम भी दबे पाँव चल रहे हैं
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    Akhtar Hoshiyarpuri
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Charagh SharmaCharagh SharmaAzhar IqbalAzhar IqbalBehzad LakhnaviBehzad LakhnaviZia MazkoorZia MazkoorAnand Narayan MullaAnand Narayan MullaVikram Gaur VairagiVikram Gaur VairagiAbbas QamarAbbas QamarMeraj FaizabadiMeraj FaizabadiKafeel Aazar AmrohviKafeel Aazar Amrohvi