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जो बोया है वही ग़म काटना होगा
कहो अब आप कैसे फ़ैसला होगा
कहो अब आप कैसे फ़ैसला होगा
जहाँ देखा वहाँ तक रौशनी देखी
जो सूरज का ग़ज़ब का हौसला होगा
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एक काली रात में ये ज़िंदगी जानी
इश्क़ को तख़सीस से कोई दुहाई दे
इश्क़ को तख़सीस से कोई दुहाई दे
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बैठा हूँ जहाँ, आग लगा कर ही उठा हूँ
है ख़ौफ़ मुझे मौत की ता'ज़ीर से ऐ दिल
है ख़ौफ़ मुझे मौत की ता'ज़ीर से ऐ दिल
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नूर बरसा है किस आशियाँ से
धूप आती है महविश कहाँ से
धूप आती है महविश कहाँ से
अब न हम को तलाशा करो तुम
हम फ़ना हो गए है जहाँ से
है निगोड़ी मोहब्बत ये कैसी
गुफ़्तूगू कर रहा रफ्तगाँ से
तू गुमाँ कर न अपनी जबीं पर
दास्ताँ बन गई दास्ताँ से
तुम न रूठो मोहब्बत से इतना
उठ चले हम तेरे आस्ताँ से
उम्र भर क़ैद दिल में रहेंगे
हम न उफ़ भी करेंगे ज़बाँ से
रात है जाम-ख़ोशा-ए-महफ़िल
ख़ूब गुज़री है पीर-ए-मुग़ाँ से
अश्क-ए-दीदा हुए इश्क़-ए-ग़ाफ़िल
ज़हर उतरा नहीं जिस्म-ओ-जाँ से
तुम बताओ मैं जाऊँ कहाँ अब
शिव गया हार इस इम्तिहाँ से
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