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Shivansh Singhaniya

Top 10 of Shivansh Singhaniya

Shivansh Singhaniya

Top 10 of Shivansh Singhaniya

    सिर काट कर दरख़्त से लटका दिया मिरा
    इतने क़ुसूर पर की निवाला निगल लिया
    Shivansh Singhaniya
    10
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    "अधूरा ख़्वाब"
    मैं ने एक अधूरा ख़्वाब देखा, जो शायद कभी पूरा न हो सकेगा
    एक रात घर में मुझे किसी की आहट हुई।

    मुझे लगा, कि तुम हो

    मैं तुम्हें देखने उसी बंद कमरे में गया।
    ज़मीं पर तुम्हारी यादों में गुम सो गया।

    उस ख़्वाब में जब तुम आईं, तो मैं ने तुम्हें बतलाया कि -
    "देखो तुम्हारे जाने के बा'द दिनों तक हमारा बिस्तर नहीं सँवरा,
    उस बिस्तर पे बिछी चादर की सिलवटें आज भी ज्यूँ की त्यों हैं ।

    मुझे ये बिस्तर, तकिया और इस चादर की सिलवटें,
    हर रात उन्हीं बीती तन्हा शबों की याद दिलाती है।
    जो मैं ने और तुम ने साथ गुज़ारी थीं।
    वही रातें जिन रातों में तुम इस चादर की सिलवटों की अँगड़ाई में,
    और मैं तुम्हारी बाँहों में समाया था।"

    मैं इस के आगे कुछ और बतला पाता और तुम्हारे क़रीब आता कि
    घर के दरवाज़े की खटखट ने,
    मेरी गहरी मुक़म्मल नींद को मौत में तब्दील होने से रोक लिया।।

    और वो अधूरा ख़्वाब अधूरा ही रहा, फिर कभी पूरा न हो सका।
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    Shivansh Singhaniya
    9
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    जो बोया है वही ग़म काटना होगा
    कहो अब आप कैसे फ़ैसला होगा

    जहाँ देखा वहाँ तक रौशनी देखी
    जो सूरज का ग़ज़ब का हौसला होगा
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    Shivansh Singhaniya
    8
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    है मोहब्बत आप से इन दस्तकों के दरमियाँ
    चाँद निकला आज फिर उन दो घरों के दरमियाँ
    Shivansh Singhaniya
    7
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    रस्सी तो जल गई है मगर बल नहीं गया
    साक़ी पिला न जाम मदद-गार की तरह
    Shivansh Singhaniya
    6
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    एक काली रात में ये ज़िंदगी जानी
    इश्क़ को तख़सीस से कोई दुहाई दे
    Shivansh Singhaniya
    5
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    यूँ न देखो इन निगाहों से
    लाख धोखे हैं निगाहों में
    Shivansh Singhaniya
    4
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    बैठा हूँ जहाँ, आग लगा कर ही उठा हूँ
    है ख़ौफ़ मुझे मौत की ता'ज़ीर से ऐ दिल
    Shivansh Singhaniya
    3
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    हम भी भुला सके न वो काजल हिजाब का
    हम, नाम लिख सके न तो हम-नाम लिख दिया
    Shivansh Singhaniya
    2
    0 Likes
    नूर बरसा है किस आशियाँ से
    धूप आती है महविश कहाँ से

    अब न हम को तलाशा करो तुम
    हम फ़ना हो गए है जहाँ से

    है निगोड़ी मोहब्बत ये कैसी
    गुफ़्तूगू कर रहा रफ्तगाँ  से

    तू गुमाँ कर न अपनी जबीं पर
    दास्ताँ बन गई दास्ताँ से

    तुम न रूठो मोहब्बत से इतना
    उठ चले हम तेरे आस्ताँ से

    उम्र भर क़ैद दिल में रहेंगे
    हम न उफ़ भी करेंगे ज़बाँ से

    रात है जाम-ख़ोशा-ए-महफ़िल
    ख़ूब गुज़री है पीर-ए-मुग़ाँ से

    अश्क-ए-दीदा हुए इश्क़-ए-ग़ाफ़िल
    ज़हर उतरा नहीं जिस्म-ओ-जाँ से

    तुम बताओ मैं जाऊँ कहाँ अब
    शिव गया हार इस इम्तिहाँ से
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    Shivansh Singhaniya
    1
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Aktar aliAktar ali'June' Sahab Barelvi'June' Sahab BarelviKrish Gour 'Jazbaat'Krish Gour 'Jazbaat'100rav100ravManoj Sharma "Chandan"Manoj Sharma "Chandan"Shivam PrajapatiShivam PrajapatiPiyush ShrivastavaPiyush ShrivastavaYash SharmaYash SharmaShivsagar SaharShivsagar SaharPrakamyan GautamPrakamyan Gautam