ऐ उदास लड़की
जहाॅं से रूठी हुई ऐ उदास लड़की तुझे
ख़बर नहीं तिरा हुस्न ओ जमाल ढल रहा है
कई बरस से बदन पे वही दरीदा लिबास
तेरा ये चेहरा मगर पैरहन बदल रहा है
निगाह से नज़र आता है मुंतज़िर है तू
लबों पे वज़्न-ए-गोहर गर्द-ए-राह ख़्यालों पर
अगर कभी कोई जो गुफ़्तगू करे तुम से
तो होगी इब्तिदा और इंतिहा सवालों पर
तेरे मिज़ाज में ये ख़ामोशी न थी पहले
मैं जानता हूँ कि इस का तवील सिलसिला है
तमाशबीन कोई भी क़यास कर लेगा
ये कम सुख़न किसी ग़म में ज़रूर मुब्तिला है
उमीद-ए-यार में बुझती हुई ये चश्म-ए-तर
इसी गुमान में तू कब तलक जलाएगी
भुला के दहर तू जिन साअ'तों में खोई है
न कट सकेंगी मगर उम्र बीत जाएगी
सराब-ए-नक़्श इस उम्मीद के मिटा दो तुम
मैं शहर-ए-ख़्वाब के ख़ाकों में रंग भर दूँगा
मैं जानता हूँ कि मुश्किल है पर तू मेरी तरफ़
क़दम बढ़ा मैं तुम्हें फिर हसीन कर दूँगा
Read Fullख़बर नहीं तिरा हुस्न ओ जमाल ढल रहा है
कई बरस से बदन पे वही दरीदा लिबास
तेरा ये चेहरा मगर पैरहन बदल रहा है
निगाह से नज़र आता है मुंतज़िर है तू
लबों पे वज़्न-ए-गोहर गर्द-ए-राह ख़्यालों पर
अगर कभी कोई जो गुफ़्तगू करे तुम से
तो होगी इब्तिदा और इंतिहा सवालों पर
तेरे मिज़ाज में ये ख़ामोशी न थी पहले
मैं जानता हूँ कि इस का तवील सिलसिला है
तमाशबीन कोई भी क़यास कर लेगा
ये कम सुख़न किसी ग़म में ज़रूर मुब्तिला है
उमीद-ए-यार में बुझती हुई ये चश्म-ए-तर
इसी गुमान में तू कब तलक जलाएगी
भुला के दहर तू जिन साअ'तों में खोई है
न कट सकेंगी मगर उम्र बीत जाएगी
सराब-ए-नक़्श इस उम्मीद के मिटा दो तुम
मैं शहर-ए-ख़्वाब के ख़ाकों में रंग भर दूँगा
मैं जानता हूँ कि मुश्किल है पर तू मेरी तरफ़
क़दम बढ़ा मैं तुम्हें फिर हसीन कर दूँगा
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रू-ब-रू भी न तू और ओझल नहीं
याद आती है लेकिन मुसलसल नहीं
याद आती है लेकिन मुसलसल नहीं
क्या त'अल्लुक बढ़ाऊॅं मुझे इल्म है
आज वो शख़्स होगा मगर कल नहीं
उस की शादी थी कल रात को और आज
सुब्ह से मेरे कमरे में हल-चल नहीं
मेरे अल्फ़ाज़ में यूँॅं ही आतिश न है
दोस्त काफ़ी तपा हूँ मैं सो जल नहीं
अज्नबिय्यत हो या दोस्ती हो कि इश्क़
तुझ से कोई त'अल्लुक मुकम्मल नहीं
दश्त-ए-इमकाँ में हम चल पड़े थे मगर
धूप ही धूप है कोई बादल नहीं
पड़ गई सिलवटें आज बिस्तर पे 'नाज़'
आज उस की जबीं पे कोई बल नहीं
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कल रात भी हमारी कटी दम-ब-दम उदास
दिन भी अभी शुरू हुआ है और हम उदास
दिन भी अभी शुरू हुआ है और हम उदास
मैं ख़ुद-कुशी की रेल में बैठा ख़ुशी ख़ुशी
मैं जाते जाते कर गया हूँ सारे ग़म उदास
जितना मैं तुम से दूर हुआ उतना ख़ुद के पास
सो हर क़दम मैं ख़ुश हुआ हूँ हर क़दम उदास
दुनिया में अस्ल में कोई भी ख़ुश नहीं है दोस्त
कोई उदास ज़्यादा है तो कोई कम उदास
समझो किसी के साथ मेरी शादी हो गई
समझो कि उस के कट गए सातों जनम उदास
गर छोड़ कर नहीं गया तुम को कोई कभी
तो किस सबब से 'नाज़' फिर इतनी रक़म उदास
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