Bhuwan Singh

Top 10 of Bhuwan Singh

    वस्ल चाहते थे पर हिज्र पा लिया हमने
    ज़िंदगी में फिर अपनी ग़म बढ़ा लिया हमने

    हमको चोट लगती है जब गले लगाते हैं
    क्या करें कि पत्थर से दिल लगा लिया हमने

    सोचकर ही रक्खा था हमने इस ज़मीं पर पैर
    यार ख़ुद को दलदल में फिर फॅंसा लिया हमने

    घर में रौशनी जो थी उसका एक ज़रिया था
    वो चराग़ भी ख़ुद से बस बुझा लिया हमने

    कौन अब पड़ोसी है कुछ ख़बर नहीं हमको
    शहर-ए-अजनबी में अब घर बना लिया हमने

    एक रोज़ बस की थी ऐसे जीने की कोशिश
    फिर बग़ैर उसके भी दिन बिता लिया हमने

    रात दिन बताते थे ख़ुद की ग़लतियाँ सबको
    पर वही किया सबने तो मज़ा लिया हमने

    Bhuwan Singh
    0 Likes

    दिल तोड़ने के काम में बेबाक होकर क्या मिला
    ऐ यार तुझको इश्क़ में नापाक होकर क्या मिला

    जो आँखों में ही डूबता था अब ग़मों में डूबा है
    बस डूबता ही है तो फिर तैराक होकर क्या मिला

    ये नौकरी थोड़ी न है आदत लगी है इक मुझे
    वरना मुझे यूँ रातभर ग़मनाक होकर क्या मिला

    यूँ तो हज़ारों और भी थे रास्ते बस मौत के
    फिर ये बताओ इश्क़ में ही ख़ाक होकर क्या मिला

    बस इक यही तो था जहाँ पे सिर्फ़ दिल का काम था
    तुझको 'भुवन' फिर इश्क़ में चालाक होकर क्या मिला

    Bhuwan Singh
    1 Like

    अपना ही घर समझता रहा उस मकान को
    परवाह तारे की न थी पर आसमान को

    बर्बाद करके उम्र मिरी उसने ये कहा
    बस तुम नहीं पसंद मिरे ख़ानदान को

    वो सारे फूल तोड़ गया उसको कुछ नहीं
    सबने बुरा कहा भी तो बस बाग़बान को

    उसको पता था मुझको मोहब्बत है इसलिए
    वो छेड़ता था ज़ख़्म के हर इक निशान को

    वो कारोबार करता है अब रोज़ इश्क़ का
    अब रोज़ वो सजाता है अपनी दुकान को

    Bhuwan Singh
    1 Like

    अब वो मोहब्बत ही कहाँ जो थी पुराने दौर में
    हमने किया है प्यार पर तुमसे यहाँ उस तौर में

    यारा ज़माने की तरह हम रंग पे मरते नहीं
    हम सादगी पे मर मिटे अब क्या रखा कुछ और में

    Bhuwan Singh
    1 Like

    रात दिन अब मुझे सुकून नहीं
    पहले जैसा कोई जुनून नहीं

    मैं तो शायर भी दर्द लिख के बना
    दर्द ही है रगों में ख़ून नहीं

    Bhuwan Singh
    1 Like

    अपने इश्क़ को मेरे रास्ते लगा लेना
    या कहानी में अपने फ़लसफ़े लगा लेना

    तू अगर दिखे तो बस देखता रहूॅंगा मैं
    मैं अगर दिखूँ तो मुझको गले लगा लेना

    Bhuwan Singh
    2 Likes

    मैं जानता हूँ अब वो ख़ैरात नहीं करता
    मिलने आ भी जाए तो फिर बात नहीं करता

    सबको ही भिगोता है रस उसकी मोहब्बत का
    बस मेरी ज़मीं पर वो बरसात नहीं करता

    Bhuwan Singh
    1 Like

    फिर ग़मों से आज है पुरशाद शायर
    फिर लिखेगा आज कुछ बर्बाद शायर

    आज फिर ईजाद होगा ग़म तिरा ही
    आज फिर तुझको करेगा याद शायर

    Bhuwan Singh
    1 Like

    मैं मोहब्बत को अगर दोस्त से बढ़कर कहता
    हाल यूँ होता कि मैं मयकदे को घर कहता

    फिरता रह जाता मैं यूँ उसके ही आगे पीछे
    देखता कोई अगर मुझको तो नौकर कहता

    Bhuwan Singh
    0 Likes

    अब तो मिरे लिए वो इक शख़्स मर गया है
    जो मेरी ज़िंदगी यूँ बर्बाद कर गया है

    काफ़ी अजब रहा है ये खेल वक़्त का भी
    दिल में उतरने वाला दिल से उतर गया है

    Bhuwan Singh
    1 Like

Top 10 of Similar Writers