Shaam Shayari
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Shaam Shayari

    सुब्ह तक हिज्र में क्या जानिए क्या होता है
    शाम ही से मिरे क़ाबू में नहीं दिल मेरा

    Jigar Moradabadi
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    शाम से आँख में नमी सी है
    आज फिर आप की कमी सी है

    Gulzar
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    यूं तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है
    आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया

    Shakeel Badayuni
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    मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ
    ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ

    Bashir Badr
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    ख़्वाहिश सुखाने रक्खी थी कोठे पे दोपहर
    अब शाम हो चली मियाँ देखो किधर गई

    Adil Mansuri
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    फिर आज 'अदम' शाम से ग़मगीं है तबीअत
    फिर आज सर-ए-शाम मैं कुछ सोच रहा हूँ

    Abdul Hamid Adam
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    नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है
    ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे

    Shakeel Badayuni
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    अजब अंदाज़ के शाम-ओ-सहर हैं
    कोई तस्वीर हो जैसे अधूरी

    Asad Bhopali
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    हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते
    अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते

    Iqbal Azeem
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    आज की रात न जाने कितनी लंबी होगी
    आज का सूरज शाम से पहले डूब गया है

    Aanis Moin
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    मुँह पर नक़ाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ़ पर गुलाल
    होली की शाम ही तो सहर है बसंत की

    Lala Madhav Ram Jauhar
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    हमसे भी इक लड़की मिलने आती थी
    हम भी शाम को कैफ़े जाया करते थे

    Tanoj Dadhich
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    कभी सहर तो कभी शाम ले गया मुझ से
    तुम्हारा दर्द कई काम ले गया मुझ से

    Farhat Abbas Shah
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    नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द
    रोटियाँ भी न मयस्सर हों जिसे काम के बा'द

    Azhar Iqbal
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    ये परिंदे भी खेतों के मज़दूर हैं
    लौट के अपने घर शाम तक जाएँगे

    Bashir Badr
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    जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
    शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है

    Afzal Khan
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    बद-हवासी है बे-ख़याली है
    क्या ये हालत भी कोई हालत है

    ज़िंदगी से है जंग शाम-ओ-सहर
    मौत से शिकवा है शिकायत है

    Chandan Sharma
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    अब शहर की थकावट बेचैन कर रही है
    अब शाम हो गई है चल माँ से बात कर लें

    Akash Rajpoot
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    शाम ढलने से फ़क़त शाम नहीं ढलती है
    उम्र ढल जाती है जल्दी पलट आना मिरे दोस्त

    Ashfaq Nasir
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    मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है
    तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूबसूरत है

    बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम
    मुझे पता चला वो कितनी ख़ूबसूरत है

    Bashir Badr
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