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Shaam Shayari
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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मगर गुज़ारने वालों के दिन गुज़रते हैं
तेरे फ़िराक़ में यूँ सुबह-ओ-शाम करते हैं
Faiz Ahmad Faiz
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वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे
Parveen Shakir
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यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है
आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
Shakeel Badayuni
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नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे
Shakeel Badayuni
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'मीर' से बैअत की है तो 'इंशा' मीर की बैअत भी है ज़रूर
शाम को रो रो सुब्ह करो अब सुब्ह को रो रो शाम करो
Ibn E Insha
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हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते
अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते
Iqbal Azeem
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मुँह पर नक़ाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ़ पर गुलाल
होली की शाम ही तो सहर है बसंत की
Lala Madhav Ram Jauhar
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दिल आज शाम से ही उसे ढूँडने लगा
कल जिस के बा'द कमरे में तन्हाई आई थी
Ammar Iqbal
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मुझ से मिलना हो जिसे दिन के उजालों में मिले
ख़ुद से रहती है मुलाक़ात मिरी शाम के बा'द
Haider Khan
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अदू होते रहे अहबाब कैसी ये करिश्माई,
इसी तदबीर में मैं रोज़ सुब्ह-ओ-शाम रहता था।
Ravi 'VEER'
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सुब्ह से शाम तक है बेक़रारी सी
तिरी यादें नहीं देती ख़ुशी के पल
Meem Alif Shaz
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शाम थी हिज्र की हाल मत पूछना
आँख थकने लगे तो जिगर रो पड़े
Piyush Mishra 'Aab'
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ये शाम ख़ुशबू पहन के तेरी ढली है मुझ
में जो रेज़ा रेज़ा
मैं क़तरा क़तरा पिघल रही हूँ ख़मोश शब के समुंदरों में
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Kiran K
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लो चाँद हो गया नमू माह-ए-ख़राम का
ऐ मोमिनों लिबास-ए-सियाह ज़ेब-ए-तन करो
फ़र्श-ए-अज़ा बिछा के अज़ाख़ाने में शजर
अब सुब्ह-ओ-शाम ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन करो
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Shajar Abbas
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सुब्ह-ओ-शाम अब हम को बस उदास रहना है
ग़मज़दों की मंज़िल का रास्ता उदासी है
Rohit tewatia 'Ishq'
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शाम ढलने से फ़क़त शाम नहीं ढलती है
उम्र ढल जाती है जल्दी पलट आना मेरे दोस्त
Ashfaq Nasir
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शाम को जिस वक़्त ख़ाली हाथ घर जाता हूँ मैं
मुस्कुरा देते हैं बच्चे और मर जाता हूँ मैं
Rajesh Reddy
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कभी तो नस्ल-ओ-वतन-परस्ती की तीरगी को शिकस्त होगी
कभी तो शाम-ए-अलम मिटेगी कभी तो सुब्ह-ए-ख़ुशी मिलेगी
Abul mujahid zaid
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ख़ुश रहते हैं हँस सकते हैं भोले भाले होते हैं
वो जो शे'र नहीं कहते हैं क़िस्मत वाले होते हैं
पीना अच्छी बात नहीं है आते हैं समझाने दोस्त
और ढलते ही शाम उन्हें फिर हमीं सँभाले होते हैं
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Vineet Aashna
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