Afzal Khan

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Afzal Khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Afzal Khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है

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परिंदे लड़ ही पड़े जाएदाद पर आख़िर
शजर पे लिक्खा हुआ है शजर बराए-फ़रोख़्त

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तेरे जाने से ज़्यादा हैं न कम पहले थे
हम को लाहक़ हैं वही अब भी जो ग़म पहले थे

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देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया
आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया

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ये कह दिया है मिरे आँसुओं ने तंग आ कर
हमें ब-वक़्त-ए-ज़रूरत निकालिए साहब

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हमारे साँस भी ले कर न बच सके अफ़ज़ल
ये ख़ाक-दान में दम तोड़ते हुए सिगरेट

Afzal Khan
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ये जो कुछ लोग ख़यालों में रहा करते हैं
उन का घर-बार भी होता है नहीं भी होता

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इसी लिए हमें एहसास-ए-जुर्म है शायद
अभी हमारी मोहब्बत नई नई है ना

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जाने क्या क्या ज़ुल्म परिंदे देख के आते हैं
शाम ढले पेड़ों पर मर्सिया-ख़्वानी होती है

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किसी ने ख़्वाब में आकर मुझे ये हुक्म दिया
तुम अपने अश्क भी भेजा करो दुआओं के साथ

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ये मोहब्बत के महल तामीर करना छोड़ दे
मैं भी शहज़ादा नहीं हूँ तू भी शहज़ादी नहीं

Afzal Khan
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नहीं था ध्यान कोई तोड़ते हुए सिगरेट
मैं तुझ को भूल गया छोड़ते हुए सिगरेट

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हमारा दिल ज़रा उकता गया था घर में रह रह कर
यूँही बाज़ार आए हैं ख़रीदारी नहीं करनी

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मैं ख़ुद भी यार तुझे भूलने के हक़ में हूँ
मगर जो बीच में कम-बख़्त शाइरी है ना

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बना रक्खी हैं दीवारों पे तस्वीरें परिंदों की
वगर्ना हम तो अपने घर की वीरानी से मर जाएँ

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मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी
मोहब्बत की कहानी में अदाकारी नहीं करनी

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लोगों ने आराम किया और छुट्टी पूरी की
यकुम मई को भी मज़दूरों ने मज़दूरी की

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इतनी सारी यादों के होते भी जब दिल में
वीरानी होती है तो हैरानी होती है

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अब जो पत्थर है आदमी था कभी
इस को कहते हैं इंतिज़ार मियाँ

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बिछड़ने का इरादा है तो मुझ से मशवरा कर लो
मोहब्बत में कोई भी फ़ैसला ज़ाती नहीं होता

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