भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया
ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं
किस सम्त जाना है इश्क़ ए कश्ती को ये हवाएं बताएंगी
डूबें की पार कर जाएं आंखों के समंदर को, ये अदाएं बताएंगी
मैं साँसें तक लुटा सकता हूँ उसके इक इशारे पर
मगर वो मेरे हर वादे को सरकारी समझता है
तुमको क्या मालूम लोगों ने कहा क्या क्या हमें
तुमने तो बस लब दबा करके इशारा कर दिया
ये वो क़बीला है जो हुस्न को ख़ुदा माने
यहाँ पे कौन तेरी बात का बुरा माने
इशारा कर दिया है आपकी तरफ़ मैंने
ये बच्चे पूछ रहे थे कि बेवफ़ा माने
इशारा कर रहे हैं बाल ये बिखरे हुए क्या
तू मेरे पास आया है कहीं होते हुए क्या
ये इतना हँसने वाले इश्क़ में टूटे हुए लोग
तू इन से पूछना अंदर से भी अच्छे हुए क्या
नाज़ हर वक़्त तेरे कौन उठाएगा बता
अब मेरे बाद तुझे कौन मनाएगा बता
अपने क़दमों को तो मैं गिन के रखूँ राहों में
चल के तू साथ कहाँ तक मेरे आएगा बता
इक मुझे छोड़ के हर सम्त नज़र तेरी गई
और कितना तू निगाहों से गिराएगा बता
मुझ पे इल्ज़ाम लगाने से ये पहले सुन ले
क्या करेगा जो तेरा नाम भी आएगा बता
आतिश-ए-इश्क़ में हम शौक़ से जल जाएँगे
खाक़ मेरी तू हवाओं में उड़ाएगा बता
हम ज़माने से भी लड़ जाएँ जो तेरी ख़ातिर
फ़र्द तू फ़र्ज़ मुहब्बत का निभाएगा बता
वो अपना दिल हमारा क्यूँ नहीं करती
मोहब्बत से पुकारा क्यूँ नहीं करती
नज़र भर के मुझे वो देखती तो है
मगर कोई इशारा क्यूँ नहीं करती
तुम्हें फिर से इशारा क्यों करें हम
भरे ज़ख़्मों को ताज़ा क्यों करें हम
तुम्हें फिर से मोहब्बत जान कर के
मोहब्बत अपनी ज़ाया क्यों करें हम