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Heart Touching Ghar Shayari
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
Tehzeeb Hafi
20
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घर के बाहर ढूँढ़ता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है
Rahat Indori
19
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धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना
अब वो मिलने आए तो उस को घर ठहराना।
तुम को दूर से देखते देखते गुज़र रही है
मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना।
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Tehzeeb Hafi
18
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हज़ारों क़ुमक़ुमों से जगमगाता है ये घर लेकिन
जो मन में झाँक के देखूँ तो अब भी रौशनी कम है
Aanis Moin
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तू परिंदा है किसी शाख़ को घर कर लेगा
जो तेरे हिज्र का मारा है किधर जाएगा
Shadab Javed
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समझ के आग लगाना हमारे घर में तुम
हमारे घर के बराबर तुम्हारा भी घर है
Hafeez Banarasi
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रेल की सीटी में कैसे हिज्र की तम्हीद थी
उस को रुख़्सत कर के घर लौटे तो अंदाज़ा हुआ
Parveen Shakir
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इन का उठना नहीं है हश्र से कम
घर की दीवार बाप का साया
Unknown
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नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे
मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे
तुम्हारी मेज़बानी के बहाने
कोई दिन हम भी अपने घर मिलेंगे
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Khurram Afaq
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एक मुद्दत से हैं सफ़र में हम
घर में रह कर भी जैसे बेघर से
Azhar Iqbal
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प्यार में कैसी थकन कह के ये घर से निकली
कृष्ण की खोज में वृषभानु-लली मीलों तक
Kunwar Bechain
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सब से अपनापन दिखलाने वाला मैं
अपने घर में ग़ैर हुआ हूँ जान लो तुम
Vikas Sahaj
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गुमान है या किसी विश्वास में है
सभी अच्छे दिनों की आस में है
ये कैसा जश्न है घर वापसी का
अभी तो राम ही वनवास में है
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Azhar Iqbal
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जाने क्या कुछ कर बैठा है
बहुत दिनों से घर बैठा है
वो मधुमास लिखे भी कैसे
शाखों पर पतझर बैठा है
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Vigyan Vrat
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तुम परिंदों से ज़ियादा तो नहीं हो आज़ाद
शाम होने को है अब घर की तरफ़ लौट चलो
Irfan Siddiqi
6
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ये परिंदे भी खेतों के मज़दूर हैं
लौट के अपने घर शाम तक जाएँगे
Bashir Badr
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घर में झीने रिश्ते मैं ने लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
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घर के बुज़ुर्ग लोगों की आँखें क्या बुझ गईं
अब रौशनी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
आए थे मीर ख़्वाब में कल डाँट कर गए
क्या शा'इरी के नाम पर कुछ भी नहीं रहा
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Aalok Shrivastav
3
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अब मज़ीद उस से ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता
जिस से इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता
पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते
घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
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Tehzeeb Hafi
2
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ये सर्द रात ये आवारगी ये नींद का बोझ
हम अपने शहर में होते तो घर चले जाते
Ummeed Fazli
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Maa Shayari
Yaad Shayari
Sukoon Shayari Collection
Zindagi Shayari Collection
Bachpan Shayari