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Diversity Shayari Collection
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले
Mirza Ghalib
20
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना
एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है
हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है
कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
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Kumar Vishwas
19
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मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वही-ए-इलाही है
मज़हब तो बस मज़हब-ए-दिल है बाक़ी सब गुमराही है
Majrooh Sultanpuri
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अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए
जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए
Gopaldas Neeraj
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वर्ना इंसान मर गया होता
कोई बे-नाम जुस्तुजू है अभी
Ada Jafarey
16
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हक़ीक़ी और मजाज़ी शा'इरी में फ़र्क़ ये पाया
कि वो जा
में से बाहर है ये पाजा
में से बाहर है
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Akbar Allahabadi
15
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अपनी हस्ती का भी इंसान को इरफ़ाँ न हुआ
ख़ाक फिर ख़ाक थी औक़ात से आगे न बढ़ी
Shakeel Badayuni
14
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फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना
मगर इस में लगती है मेहनत ज़ियादा
Altaf Hussain Hali
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इस क़दर हम ख़ुश रखेंगे आप को ससुराल में
आप को महसूस होगा जी रहे ननिहाल में
दो गुलाबों की तरह है दो चमेली की तरह
फ़र्क़ बस इतना तुम्हारे होंठ में और गाल में
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Tanoj Dadhich
12
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उस के अच्छे शे'र नहीं भाते हम को
जो अच्छा इंसान नहीं बन पाता है
Tanoj Dadhich
11
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हिन्दी में और उर्दू में फ़र्क़ है तो इतना
वो ख़्वाब देखते हैं हम देखते हैं सपना
Unknown
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किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया
तुम्हारी उर्मियों का मैं, उर-अंतर हो नहीं पाया
सरल थीं मन की प्रतिमाएं, मगर अफ़सोस है इतना
मैं सब कुछ था तेरा, मेहंदी महावर हो नहीं पाया
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Puneet Mishra Akshat
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किसी ने कर लिया बर्बाद ख़ुद को
किसी को फ़र्क़ तक पड़ता नहीं है
gulab muntazir
8
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रोने से भी अब कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है उन को
कल तक चुभती थी जिन को पलभर की ख़ामोशी मेरी
Sandeep dabral 'sendy'
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फ़र्क़ रहने दो मिरी जाँ हम में तुम में
कौन जाने अगले ही पल क्या हो जाए
Ajeetendra Aazi Tamaam
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इक तपस्या ये विविधता ही बनेगी शक्ति अपनी
इक ये परिभाषा बने बस देश भर में भक्ति अपनी
"Dharam" Barot
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बहुत हैं शहर भर में अब मुझे भी चाहने वाले
तुझे बनना है बन जा बे-वफ़ा क्या फ़र्क़ पड़ता है
A R Sahil "Aleeg"
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अच्छों से पता चलता है इंसाँ को बुरों का
रावन का पता चल न सका राम से पहले
Rizwan Banarasi
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क़त्ल कर के जनाज़ा उठाते रहे
ख़ैर मय्यत को क्या फ़र्क़ पड़ता भला
KalamKeAlfaz Dip
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लड़कियाँ आँखों से ही कर सकती हैं क़त्ल
हुस्न और तलवार में काफ़ी फ़र्क़ है
Milan Gautam
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