Diversity Shayari
Top 20

Diversity Shayari

    मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
    तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे

    Mirza Ghalib
    178 Likes

    बिखर के फूल फ़ज़ाओं में बास छोड़ गया
    तमाम रंग यहीं आस-पास छोड़ गया

    Aanis Moin
    19 Likes

    लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
    उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी

    Firaq Gorakhpuri
    32 Likes

    आप दस्ताने पहनकर छू रहे हैं आग को
    आप के भी ख़ून का रंग हो गया है साँवला

    Dushyant Kumar
    25 Likes

    अब की होली में रहा बे-कार रंग
    और ही लाया फ़िराक़-ए-यार रंग

    Imam Bakhsh Nasikh
    17 Likes

    चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे
    बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग

    Azhar Iqbal
    47 Likes

    तुम्हारी याद का रंग डाल कर के
    कहा तन्हाई ने होली मुबारक !

    Bhaskar Shukla
    40 Likes

    ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
    कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है

    Ghulam Mohammad Qasir
    24 Likes

    होली के इस पावन रंग में प्यार का रंग मिला दूँगा
    तुम कितना भी बच लो जानम तुमको मैं नहला दूँगा

    Nirbhay Nishchhal
    2 Likes

    बड़े तहज़ीब से मिलने लगी हो
    दरारें बढ़ रही हैं दिल्लगी में

    Umesh Maurya
    0 Likes

    तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर
    जो तुझको देख चुका हो वो और क्या देखे

    Parveen Shakir
    84 Likes

    उस ने वा'दा किया है आने का
    रंग देखो ग़रीब ख़ाने का

    Josh Malihabadi
    33 Likes

    वो करेंगे वस्ल का वादा वफ़ा
    रंग गहरे हैं हमारी शाम के

    Muztar Khairabadi
    29 Likes

    अब के होली पे लगा रंग उतरता ही नहीं
    किस ने इस बार हमें रंग लगाया हुआ है

    Zia Zameer
    29 Likes

    खँगालने हैं मुझे अपने सब से अच्छे शे'र
    जो तुझ को रंग दे ऐसा गुलाल ढूँढना है

    Amulya Mishra
    44 Likes

    इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग
    रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग

    Swapnil Tiwari
    47 Likes

    गूँध के गोया पत्ती गुल की वो तरकीब बनाई है
    रंग बदन का तब देखो जब चोली भीगे पसीने में

    Meer Taqi Meer
    28 Likes

    फ़क़त रंग ही उन का काला नहीं है
    इसी क़िस्म की ख़ूबियाँ और भी हैं

    Sarfaraz Shahid
    23 Likes

    हमें पसंद सही अब ये रंग मत पहनो
    पराए तन पे हमारी उमंग मत पहनो

    हमारी रूह पे पड़ती हैं बदनुमा शिकनें
    लिबास पहनो मगर इतना तंग मत पहनो

    Liyaqat Ali Aasim
    22 Likes

    न छेड़ नाम-ओ-नसब और नस्ल-ओ-रंग की बात
    कि चल निकलती है अक्सर यहीं से जंग की बात

    Zafar naseemi
    29 Likes

How's your Mood?