ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है
होली के इस पावन रंग में प्यार का रंग मिला दूँगा
तुम कितना भी बच लो जानम तुमको मैं नहला दूँगा
गूँध के गोया पत्ती गुल की वो तरकीब बनाई है
रंग बदन का तब देखो जब चोली भीगे पसीने में
हमें पसंद सही अब ये रंग मत पहनो
पराए तन पे हमारी उमंग मत पहनो
हमारी रूह पे पड़ती हैं बदनुमा शिकनें
लिबास पहनो मगर इतना तंग मत पहनो
न छेड़ नाम-ओ-नसब और नस्ल-ओ-रंग की बात
कि चल निकलती है अक्सर यहीं से जंग की बात