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Dhoop Shayari
रिश्तों की ये नाज़ुक डोरें तोड़ी थोड़ी जाती हैं,
अपनी आँखें दुखती हों तो फोड़ी थोड़ी जाती हैं
ये काँटे, ये धूप, ये पत्थर इनसे कैसा डरना है
राहें मुश्किल हो जाएँ तो छोड़ी थोड़ी जाती हैं
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Subhan Asad
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हाल पूछा न करे हाथ मिलाया न करे
मैं इसी धूप में ख़ुश हूँ कोई साया न करे
Kashif Husain Ghair
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गहरी सोचें लम्बे दिन और छोटी रातें
वक़्त से पहले धूप सरों पे आ पहुँची
Aanis Moin
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क्यूँ ऐसा रिश्ता क़ाएम रखना जिस
में केवल दर्द मिलें
ना धूप मिले न छाव मिले बस मौसम सारे सर्द मिलें
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Amit Joshi anhad
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सनम हैं सर्दियों की धूप जैसी
ज़रा दीदार कर के देख लो जी
Saarthi Baidyanath
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धूप से रूठ कर कहाँ कोई
पेड़ अपनी जड़ें बदलता है
Saarthi Baidyanath
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धूप की तरह एक लड़की है
जो मेरे हाथ में नहीं आती
Saarthi Baidyanath
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी
ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं
जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
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Vikram Gaur Vairagi
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अब वो छत पर मुझे ऐसे बुलाती है
जैसे वो धूप जाड़े में दिसंबर की
Meem Alif Shaz
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सब नहीं करते हैं जो मैं बस वही करता हूँ
घर जला के मोहल्ले में रौशनी करता हूँ
तुम क्या छीनोगे यार मोहब्बत मेरी
दुश्मनों से भी मेरे मैं दिल लगी करता हूँ
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Shashank Shekhar Pathak
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वो धूप में आई है छत पे बैठने
पहली दफ़ा इक चाँद दिन में देखा है
Rachit Sonkar
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ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैं
ग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं
Mahirul Qadri
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झूट पर उस के भरोसा कर लिया
धूप इतनी थी कि साया कर लिया
Shariq Kaifi
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जली हैं धूप में शक्लें जो माहताब की थीं
खिंची हैं काँटों पे जो पत्तियाँ गुलाब की थीं
Dagh Dehlvi
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रौशनी बढ़ने लगी है शहर की
चाँद छत पर आ गया है देखिए
Divy Kamaldhwaj
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सुनहरी धूप, ठंडी हवाएँ और ये सफ़र
न जाने कब तेरा गांँव गुज़रा, कुछ पता नहीं
"Nadeem khan' Kaavish"
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पाँव में खनकी चाँदी हो जैसे
उस ने मुंडेर फाँदी हो जैसे
छत पे दो पल मिलन जुदाई में
धूप में बूँदा-बाँदी हो जैसे
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Sandeep Thakur
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धूप है और तन्हाई भी है
ज़िन्दगी हम गुज़ारेंगे कैसे
Meem Alif Shaz
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सिर्फ़ इतनी सी गुंजाइश है वस्ल दिखने की
जैसे इत्तिफ़ाक़न बारिश में धूप दिख जाए
Nishant Singh
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आग उगलती रातों में इक शीतलता सी छायी थी
गर्मी की छुट्टी में फिर वो मामा के घर आई थी
Shubham Seth
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