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Aadmi Shayari
ऐ आसमान तेरे ख़ुदा का नहीं है ख़ौफ़
डरते हैं ऐ ज़मीन तेरे आदमी से हम
Unknown
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उम्र भर साँप से शर्मिंदा रहे ये सुन कर
जब से इंसान को काटा है तो फन दुखता है
Munawwar Rana
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साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का
उम्मीद बाँधिए न बड़े आदमी के साथ
Kaif Bhopali
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जानिए उस से निभेगी किस तरह
वो ख़ुदा है मैं तो बंदा भी नहीं
Jaun Elia
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हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
जिस को भी देखना हो कई बार देखना
Nida Fazli
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रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं
Mirza Ghalib
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अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए
जिस में इंसान को इंसान बनाया जाए
Gopaldas Neeraj
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देखें क़रीब से भी तो अच्छा दिखाई दे
इक आदमी तो शहर में ऐसा दिखाई दे
Zafar Gorakhpuri
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इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बा'द
Kaifi Azmi
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बस्ती में अपनी हिन्दू मुसलमाँ जो बस गए
इंसाँ की शक्ल देखने को हम तरस गए
Kaifi Azmi
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अब जो पत्थर है आदमी था कभी
इस को कहते हैं इंतिज़ार मियाँ
Afzal Khan
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया
बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं
Akbar Allahabadi
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं
वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं
इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर
ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
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Tehzeeb Hafi
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ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से
फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है
Khumar Barabankvi
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ढा दे जो इंसान के दिल में रंग ओ नस्ल की दीवारें
कोई तो दस्तूर-ए-मोहब्बत ऐसा आलमगीर लिखो
Iliyas ishqi
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बात ये है कि आदमी शाइ'र
या तो होता है या नहीं होता
Mahboob Khizan
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बड़ी हसरत से इंसाँ बचपने को याद करता है
ये फल पक कर दोबारा चाहता है ख़ाम हो जाए
Nushur Wahidi
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साथ चावल के ये कंकर भी निगल जाता है
भूक में आदमी पत्थर भी निगल जाता है
Javed Naseemi
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सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें
आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत
Bashir Badr
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