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उस के दिल से कोई आख़िर हम निकालें और कैसे
जो हक़ीक़त है हक़ीक़त को भुला दें और कैसे
जो हक़ीक़त है हक़ीक़त को भुला दें और कैसे
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दो पल में कोई भी बात दिल के करार पे नहीं आती
ये जो मोहब्बत हैं जाँ बिना ए'तिबार के नहीं आती
ये जो मोहब्बत हैं जाँ बिना ए'तिबार के नहीं आती
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दे दिए है दाग अब तो रंग जमना चाहिए
बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए
बस तिरे इस हाथ में ख़ंजर न दिखना चाहिए
लग गए है घाव जितने रख दिए है खोल कर
हो न हो इस रंज का अंजाम होना चाहिए
दिल मिरा ये थम गया है हिज्र की इक बात पर
कह रही है वो कि मुझ को आम लगना चाहिए
है नहीं कोई गिला अब है नहीं कोई दुखन
इन लबो की मुस्कुराहट को दवा बनना चाहिए
थे अकल के काम करने को जमाने में 'निकुंज'
हम वही करते रहे जो दिल समझना चाहिए
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