न तीर्थ जा कर न धर्म ग्रंथो का सार पा कर
सुकूँ मिला है मुझे तो बस तेरा प्यार पा कर
ग़रीब बच्चे किताब पढ़ कर सँवर रहे हैं
अमीर लड़के बिगड़ रहे हैं दुलार पा कर
और भी दुनिया में मंज़र ख़ूबसूरत हैं मगर
तेरी ज़ुल्फ़ों झटकने से सुहाना कुछ नहीं
नदी को कोसते हैं सब किसी के डूब जाने पर
नदी में डूबते को पर कोई तिनका नहीं देता
हमारे दरमियाँ जो प्यार से पहले की यारी थी
बिछड़ कर अब ये लगता है वो यारी ज्यादा प्यारी थी
बिछड़ना उसकी मर्ज़ी थी, उसे उतरन न कहना तुम
वो अब उतनी ही उसकी है वो तब जितनी तुम्हारी थी
बिना तेरे अधूरे मेरे हर इक शेर रह जाते
कि जैसे राम बिन शबरी के सारे बेर रह जाते
तुम्हारे वास्ते मैंने यहाँ महफ़िल सजाई थी
भला होता अगर तुम और थोड़ी देर रह जाते
प्रेम में इस क़दर हम तुम्हारे हुए
है न ख़ुद पे असर हम तुम्हारे हुए
चल रही है ये जो साँस अंतिम ही है
देख लो इक नज़र हम तुम्हारे हुए
तेरी आँखों में एक दरिया है उस दरिया में मुझे बहने दो
तेरे हृदय में एक कुटिया है उस कुटिया में मुझे रहने दो
फिर जाने कितने ही शायर मुझको सुन कर इतरायेंगे
मेरे गीतों में, मेरे छंदों में, मुझे तेरी ही गाथा कहने दो