डूबती नाव को दे कौन सहारा, बोलो
इक तुम्हारे सिवा है कौन हमारा, बोलो
तुम जो कहते हो कि इक रोज़ बिछड़ जाओगे
क्या बिगाड़ा है भला हमने तुम्हारा, बोलो
ज़माने वो नहीं हैं अब मुहब्बत देखते थे सब
करेगी इश्क़ जो मुझसे मिरी तनख़्वाह देखेगी
मदमस्त महकते फूलों को इन कलियों को चूमा जाए
इक ख़्वाहिश मेरी यह भी है तेरी गलियों में घूमा जाए
इश्क़ बाज़ी से अगर फुर्सत मिले तो दोस्तों
बाप के कंधों पे कितना बोझ है ये देख लो
रहूँ उदास तो कुछ लोग उदास रहते हैं
अजीब लोग मिरे आस-पास रहते हैं
भले ही फ़ासले कितने हों दरमियाँ लेकिन
जो लोग ख़ास हैं वो लोग ख़ास रहते हैं
चाँद सा मुखड़ा तुम्हारा उस पे ये गर्दन का तिल
हाय! कैसे हम फ़िदा हो जाए न तुम पर सनम