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मैं बुरा हूँ और हूँ मजबूऱ आदत के लिए
दूर रहिए आप भी अपनी शराफत के लिए
दूर रहिए आप भी अपनी शराफत के लिए
है अगर मुझ से गिला तो आज़मा के देख ले
तू कहे तो जान हाज़िर है मुहब्बत के लिए
तेरे आगे ख़ूब-सूरत चाँद भी फीका पड़े
और क्या तारीफ़ तेरी यार सूरत के लिए
आदतों से यार गर तासीर मिलती है यहाँ
ख़ुद को भी बर्बाद कर लूँ मैं भी आदत के लिए
मर के ही तो आदमी बनता बड़ा है आज , सो
हम भी देखो मर रहे हैं थोड़ी इज़्ज़त के लिए
बे-वफ़ा हैं, आप फिर भी दिल लगाया आपसे
मिल रही है इस लिए भी दाद हिम्मत के लिए
घर में कुछ भी बोल कर चल जाएगा तो काम पर
भीड़ में क्या बोलना है सीख गैरत के लिए
ये शिकायत मुझ को है क्यूँ दोहरापन है यहाँ
इस जहाँ में क़ायदे क्यूँ सिर्फ़ औरत के लिए
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अकेला ही चला था मैं अकेले ही सफ़र में हूँ
मगर मैं कार - आमद हूँ दुआ में हूँ असर में हूँ
मगर मैं कार - आमद हूँ दुआ में हूँ असर में हूँ
ख़ता हो कोई मुझ से और लोगों को मिले मौक़ा'
संभल कर पैर रखता हूँ ज़माने की नज़र में हूँ
ज़हर के हूबहू बातें निकलने का यही कारन
ज़हर ही मुझ
में है या तो रगो - पै मैं ज़हर में हूँ
तू आली है तू ने ही रंक को राजा बनाया है
ख़ुदा तू मेरी सुन ले मैं हमेशा से सिफ़र में हूँ
कभी सोंचो कि मैं हर बात पर हर बार क्यूँ राजी
मेरी उल्फ़त तुझे खोने से डरता हूँ तो डर में हूँ
जो अच्छे दिल के हैं यारों वही गुमनाम रहते हैं
मैं झूठा हूँ फ़रेबी हूँ मगर जानाँ ख़बर में हूँ
मेरा तो ख़ूब मन करता कि उस के घर को जाऊँ मैं
मगर वो ये नहीं कहता चले आओ मैं घर में हूँ
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