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Prashant Sitapuri

Top 10 of Prashant Sitapuri

Prashant Sitapuri

Top 10 of Prashant Sitapuri

    मुझे खोने से पहले जान लेना
    मेरे जैसे तलाशे जा रहे हैं
    Prashant Sitapuri
    10
    19 Likes
    हम हैं दीवाने तेरे सो प्यास नहीं होंठो की
    मुझ को बोसा देना हो तो पेशानी पर देना
    Prashant Sitapuri
    9
    8 Likes
    जब तलक था बाप ज़िंदा घर में भाई एक थे
    उस के जाते ही ज़मीं पर सबके हिस्से आ गए
    Prashant Sitapuri
    8
    6 Likes
    माँ जब बीमार होती है कहीं भी जी नहीं लगता
    माँ के बीमार होने पर वही घर काटता मुझ को
    Prashant Sitapuri
    7
    3 Likes
    गरजती है बरसती है मनाती है वही लड़की
    परीशाँ जब भी होता हूँ हँसाती है वही लड़की

    शिकायत करती है वो भी मगर अंदाज़ ऐसा है
    लिपटती है गले कस के लगाती है वही लड़की

    जहाँ में जितनी ख़ूबी हैं मुझे सब उस
    में दिखती हैं
    न कोई और मुझ को सिर्फ़ भाती है वही लड़की

    वो कितनी ख़ूब-सूरत है मैं सब को अब बताऊँगा
    हुआ है ये मेरे सपनों में आती है वही लड़की

    हँसी में जब भी कहता हूँ मैं तुम को भूल जाऊँगा
    रो-रोकर यार तब ग़ुस्सा दिखाती है वही लड़की

    न जाने क्या क्या कहती है मेरे बीमार होने पर
    मुझे सच में बहुत बातें सुनाती है वही लड़की
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    Prashant Sitapuri
    6
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    मैं बुरा हूँ और हूँ मजबूऱ आदत के लिए
    दूर रहिए आप भी अपनी शराफत के लिए

    है अगर मुझ से गिला तो आज़मा के देख ले
    तू कहे तो जान हाज़िर है मुहब्बत के लिए

    तेरे आगे ख़ूब-सूरत चाँद भी फीका पड़े
    और क्या तारीफ़ तेरी यार सूरत के लिए

    आदतों से यार गर तासीर मिलती है यहाँ
    ख़ुद को भी बर्बाद कर लूँ मैं भी आदत के लिए

    मर के ही तो आदमी बनता बड़ा है आज , सो
    हम भी देखो मर रहे हैं थोड़ी इज़्ज़त के लिए

    बे-वफ़ा हैं, आप फिर भी दिल लगाया आपसे
    मिल रही है इस लिए भी दाद हिम्मत के लिए

    घर में कुछ भी बोल कर चल जाएगा तो काम पर
    भीड़ में क्या बोलना है सीख गैरत के लिए

    ये शिकायत मुझ को है क्यूँ दोहरापन है यहाँ
    इस जहाँ में क़ायदे क्यूँ सिर्फ़ औरत के लिए
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    Prashant Sitapuri
    5
    13 Likes
    अकेला ही चला था मैं अकेले ही सफ़र में हूँ
    मगर मैं कार - आमद हूँ दुआ में हूँ असर में हूँ

    ख़ता हो कोई मुझ से और लोगों को मिले मौक़ा'
    संभल कर पैर रखता हूँ ज़माने की नज़र में हूँ

    ज़हर के हूबहू बातें निकलने का यही कारन
    ज़हर ही मुझ
    में है या तो रगो - पै मैं ज़हर में हूँ

    तू आली है तू ने ही रंक को राजा बनाया है
    ख़ुदा तू मेरी सुन ले मैं हमेशा से सिफ़र में हूँ

    कभी सोंचो कि मैं हर बात पर हर बार क्यूँ राजी
    मेरी उल्फ़त तुझे खोने से डरता हूँ तो डर में हूँ

    जो अच्छे दिल के हैं यारों वही गुमनाम रहते हैं
    मैं झूठा हूँ फ़रेबी हूँ मगर जानाँ ख़बर में हूँ

    मेरा तो ख़ूब मन करता कि उस के घर को जाऊँ मैं
    मगर वो ये नहीं कहता चले आओ मैं घर में हूँ
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    Prashant Sitapuri
    4
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    माँ-बाप, बहन-भाई, सब दोस्त, मुहब्बत तुम
    सपनों के लिए रिश्ते कुर्बान नहीं करना
    Prashant Sitapuri
    3
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    ये दौर बुरा है तो कल अच्छा भी आएगा
    इस वक़्त ज़माने को उम्मीद ये रखनी है
    Prashant Sitapuri
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    जिस की आँखों में न थे आँसू कभी
    एक दिन वो शख़्स दरिया बन गया
    Prashant Sitapuri
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Mohak PandeyMohak PandeyManmaujiManmaujiShamsul Hasan ShamSShamsul Hasan ShamSMoni Gopal TapishMoni Gopal TapishPravendra AnuragiPravendra AnuragiPuneet Mishra AkshatPuneet Mishra AkshatGulshanGulshanZohair Ahmad SahilZohair Ahmad Sahil'June' Sahab Barelvi'June' Sahab Barelvidivya 'sabaa'divya 'sabaa'