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हमेशा से सब की नज़र में रहा मैं
दिखा पास तेरे ख़बर में रहा मैं
दिखा पास तेरे ख़बर में रहा मैं
मिला जो तुम्हें आँख में तेरी खोया
चला जादू और फिर असर में रहा मैं
ये ज़ुल्फ़ें बरसती घटा कोई जैसे
लगा धूप में भी शजर में रहा मैं
सबब क्या बताऊँ के क्यूँ मुतमइन हूँ
मिला जो मुझे तू ज़फ़र में रहा मैं
किनारा किया इश्क़ से कर के तौबा
भुला कर के उल्फ़त गुज़र में रहा मैं
निगाहों से तेरी मिला हौसला है
किया जो भी पहले मगर में रहा है
भला हिज्र के क़िस्से कब तक लिखूँगा
न जाने ख़ुदा किस कसर में रहा मैं
ठहर लूँ यहीं अब यहीं इश्क़ लिख दूँ
चला जो सफ़र में सफ़र में रहा मैं
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