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ख़ुदी को सताता रहा हूँ मैं
उसे दिल में लाता रहा हूँ मैं
उसे दिल में लाता रहा हूँ मैं
मुझे वो भुलाता चला गया
जिसे याद आता रहा हूँ मैं
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इश्क़ की राह दूर हो जैसे
सब ख़ुदा का क़ुसूर हो जैसे
सब ख़ुदा का क़ुसूर हो जैसे
उन की मासूमियत की क्या कहिए
बुत में कोई ग़ुरूर हो जैसे
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बेकली, ग़म, दर्द इन सबकी तुम्हीं बुनियाद हो
मैं तुम्हें भूला नहीं हूँ हाँ मुझे तुम याद हो
मैं तुम्हें भूला नहीं हूँ हाँ मुझे तुम याद हो
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निकले गर होंठों से तो क्या फ़ाइदा
आह दिल से भी निकलनी चाहिए
आह दिल से भी निकलनी चाहिए
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