Urdu Shayari
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Urdu Shayari

    अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा
    ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है

    Bhaskar Shukla
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    वो नशा है के ज़बाँ अक़्ल से करती है फ़रेब
    तू मिरी बात के मफ़्हूम पे जाता है कहाँ

    Pallav Mishra
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    जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ
    यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता

    Kaifi Azmi
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    फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले
    झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले

    Arzoo Lakhnavi
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    हिन्दी में और उर्दू में फ़र्क़ है तो इतना
    वो ख़्वाब देखते हैं हम देखते हैं सपना

    Unknown
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    हिन्दी महक रही है लोबान जैसी मेरी
    लहजे को मैं ने अपने उर्दू किया हुआ है

    Prof. Rehman Musawwir
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    हम हैं हिन्दी और हमारा मुल्क है हिन्दोस्ताँ
    हिन्द में पैदा तसव्वुफ़ के ज़बाँ-दाँ कीजिए

    Sahir Dehlavi
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    ख़ुशबू से किस ज़बान में बातें करेंगे लोग
    महफ़िल में ये सवाल तुझे देख कर हुआ

    Mansoor Usmani
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    तारीकियों को आग लगे और दिया जले
    ये रात बैन करती रहे और दिया जले

    उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब
    वो रौशनी की बात करे और दिया जले

    Tehzeeb Hafi
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    मिल गए थे एक बार उस के जो मेरे लब से लब
    उम्र भर होंटों पे अपने मैं ज़बाँ फेरा किया

    Jurat Qalandar Bakhsh
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    बोसा देते नहीं और दिल पे है हर लहज़ा निगाह
    जी में कहते हैं कि मुफ़्त आए तो माल अच्छा है

    Mirza Ghalib
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    तेरे एहसास को ख़ुशबू बनाते
    जो बस चलता तुझे उर्दू बनाते

    यक़ीनन इस से तो बेहतर ही होती
    वो इक दुनिया जो मैं और तू बनाते

    Saurabh Sharma 'sadaf'
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    फिर चाहे तो न आना ओ आन बान वाले
    झूटा ही वअ'दा कर ले सच्ची ज़बान वाले

    Arzoo Lakhnavi
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    मैं हिंदी और उर्दू को अलग कैसे करूँ यारों
    अगर साँसें हटा दूँ तो बदन में कुछ नहीं बचता

    Umesh Maurya
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    नादानी ये ज़रा सी ले ले न जान मेरी
    फूलों से भर रखी है मैंने मयान मेरी

    हैं आपको जो शिकवे मेरी ज़बान से जाँ
    तो काट लें लबों से अपने ज़बान मेरी

    vivek sahu
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    झूठी तारीफ़ों से सच्ची गाली अच्छी लगती है
    मुझको तो उर्दू भी हिन्दी वाली अच्छी लगती है

    Manoj Devdutt
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    इज़हार पे भारी है ख़मोशी का तकल्लुम
    हर्फ़ों की ज़बाँ और है आँखों की ज़बाँ और

    Haneef akhgar
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    एक मुद्दत की रियाज़त का सिला है 'साहिल'
    मेरे अश'आर जो लोगों की ज़बाँ तक पहुँचे

    Wajid Husain Sahil
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    जिस-जिसकी ज़बाँ बोल रही प्यार, मरेंगे
    मैं लिखता हूँ ले जाओ, मेरे यार मरेंगे

    मेरी तो मोहब्बत में फ़क़त हार हुई है
    उस लड़की पे तुम देखना दो चार मरेंगे

    Armaan khan
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    है नाज़ मुझको अपनी हिंदी ज़बाँ पे यारो
    हिंदी हैं हम वतन हैं ये देश सबसे आला

    Dr Mohsin Khan
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