Dushmani Shayari
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Dushmani Shayari

    अब दोस्त कोई लाओ मुकाबिल में हमारे
    दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला

    Munawwar Rana
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    अगर तू ख़ुश है मेरी हार से तो
    मेरी हर जीत से नफ़रत है मुझको

    Shadab Javed
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    उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा
    वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा

    Nida Fazli
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    दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम
    तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे

    Bashir Badr
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    वो जंग जिस में मुक़ाबिल रहे ज़मीर मिरा
    मुझे वो जीत भी 'अम्बर' न होगी हार से कम

    Ambreen Haseeb Ambar
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    उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं
    मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया

    Hafeez Banarasi
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    रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
    वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं

    Hafeez Jalandhari
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    कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो
    मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का

    Waseem Barelvi
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    जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो
    ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब न हो

    Nazeer Akbarabadi
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    आँधियों से लड़ रहे हैं जंग कुछ काग़ज़ के लोग
    हम पे लाज़िम है कि इन लोगों को फ़ौलादी कहें

    Ameer Imam
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    नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें
    चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें

    Unknown
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    कुछ ख़ास तो बदला नहीं जाने से तुम्हारे
    बस राब्ता कम हो गया फूलों की दुकाँ से

    Ashu Mishra
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    नाज़ क्या इस पे जो बदला है ज़माने ने तुम्हें
    मर्द हैं वो जो ज़माने को बदल देते हैं

    Akbar Allahabadi
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    ठहाका मार कर हथियार हँसते
    नहीं जीतेंगे अब इंसान हमसे

    Umesh Maurya
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    इसलिए लड़ता है मुझसे मेरा दुश्मन
    उसका भी मेरे सिवा कोई नहीं है

    Aves Sayyad
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    जंग में जिन्हे अब तक तुम झुका न पाए थे
    झुक रही हैं वो सारी पगड़ियाँ मोहब्बत में

    Alankrat Srivastava
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    हो रही थी जंग उसके नाम पर और
    वो ही मेरे दुश्मनों के काम आया

    Shashank Shekhar Pathak
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    याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन
    मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी

    Ehsan Saqib
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    मुनाफ़िक़ दोस्तों से लाख बेहतर हैं ख़ुदा दुश्मन
    कि ग़द्दारी नवाबों से हुकूमत छीन लेती है

    Unknown
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    दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ
    मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो

    मेरे मे'यार का तक़ाज़ा है
    मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो

    Akhtar Shumar
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