Shashank Shekhar Pathak

Shashank Shekhar Pathak

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Shashank Shekhar Pathak shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shashank Shekhar Pathak's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal
  • Nazm

किसी का गर सुकूँ हो तो किसी का मसअला हो तुम
दवा हो तुम, दुआ हो तुम, मरज़ हो तुम, बला हो तुम

Shashank Shekhar Pathak

चाहता नहीं पर मजबूर कर रहा है वो
जानबूझ कर खु़द से दूर कर रहा है वो

Shashank Shekhar Pathak

जुर्म किसका किसके सर इल्ज़ाम आया
आज रोया जाके तब आराम आया

हो रही थी जंग उसके नाम पर और
वो ही मेरे दुश्मनों के काम आया

Shashank Shekhar Pathak

जो तू नहीं तो कुछ नहीं मुझको मयस्सर लगता है
तू हो अगर तो मुझको कतरा भी समंदर लगता है

है हाल क्या क्या मैं कहूँ जब से गई हो छोड़कर
दिल भी नहीं लगता कहीं घर भी कहाँ घर लगता है

Shashank Shekhar Pathak

तुम्हें नाज़ है हुस्न पर तो सुनो तुम
मुझे भी जुदाई का अब डर न होता

Shashank Shekhar Pathak

हवा मेरे अपनों ने दी थी नहीं तो
जलाया किसी ने मिरा घर न होता

Shashank Shekhar Pathak

हो रही थी जंग उसके नाम पर और
वो ही मेरे दुश्मनों के काम आया

Shashank Shekhar Pathak

जीते जी मरना होता है तुम क्या जानो क्या होता है
इश्क़ करोगे तब समझोगे इश्क़ नहीं पूरा होता है

मिलना और बिछड़ जाना है खेल नहीं किस्मत का 'पाठक'
हो ही जाता है वो अक्सर होना जिसे जुदा होता है

Shashank Shekhar Pathak

अधूरी मुद्दतों से इक कहानी लिख रहा हूँ मैं
फ़रेब, इश्क़,आग और पानी लिख रहा हूँ मैं

कि मिलने आ रहे हैं फिर न मिलने की जो शर्त पर
हाँ नाम उनके ही ये ज़िंदगानी लिख रहा हूँ मैं

Shashank Shekhar Pathak

मेरे ख़्वाब नहीं पूरे होते हाँ नींद से मैं अब डरता हूँ
तेरी याद अगर आ जाए तो तस्वीर से बातें करता हूँ

Shashank Shekhar Pathak

तेरी अंँगड़ाई के आलम का ख़याल आया जब
ज़ेहन-ए-वीरांँ में खनकने लगे कंगन कितने

Shashank Shekhar Pathak

दिल की ख़ातिर एक रिश्ते को बचाने के लिए
आग मैंने ही लगा ली ख़ुद मिरे घरबार में

Shashank Shekhar Pathak

पार जिसको कर रहा था लड़ के तूफ़ानों से मैं
ख़ुद वही मुझको चला है छोड़कर मझधार में

Shashank Shekhar Pathak

तेरे आने की ख़ुशी है न है फ़ुर्क़त का ग़म
ग़म ये है बीत गये प्यार के सावन कितने

Shashank Shekhar Pathak
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सजा दूँ मांँग मैं तेरी लहू से आज मैं अपने
बुरा मानो अगर मेरे न तुम सरकार, होली में

Shashank Shekhar Pathak

जल चुका है जिस्म मेरा राख हूँ मैं
पर मुझे अब भी मिली राहत नहीं है

Shashank Shekhar Pathak

जिसकी खा़तिर हम भुला बैठे हैं दुनिया
दोस्तों से ही उन्हें फ़ुर्सत नहीं है

Shashank Shekhar Pathak

जान ले लो जान तुम मेरी यक़ीनन
जान लेना तो मिरी फितरत नहीं है

Shashank Shekhar Pathak

छोड़ दूँ उसको भला मैं किस तरह से
वो मोहब्ब़त है मिरी, आदत नहीं है

Shashank Shekhar Pathak

छोड़ दूँ उसको भला मैं किस तरह से
वो मोहब्ब़त है मिरी, आदत नहीं है

जिसकी खा़तिर हम भुला बैठे हैं दुनिया
दोस्तों से ही उन्हें फ़ुर्सत नहीं है

Shashank Shekhar Pathak

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