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दिल की ख़ातिर एक रिश्ते को बचाने के लिए
आग मैं ने ही लगा ली ख़ुद मिरे घरबार में
आग मैं ने ही लगा ली ख़ुद मिरे घरबार में
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तेरे आने की ख़ुशी है न है फ़ुर्क़त का ग़म
ग़म ये है बीत गए प्यार के सावन कितने
ग़म ये है बीत गए प्यार के सावन कितने
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तिरंगा दिल में है लबों पे हिंदुस्तान रखता हूँ
सिपाही हूँ हथेली पे मैं अपनी जान रखता हूँ
सिपाही हूँ हथेली पे मैं अपनी जान रखता हूँ
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गली हर इक मोहब्बत की अँधेरी हो नहीं सकती
सिवा मज़हब के मजबूरी तो तेरी हो नहीं सकती
सिवा मज़हब के मजबूरी तो तेरी हो नहीं सकती
किया था इश्क़ मैं ने जब तभी ये जानता था मैं
तू लड़की है 'अलीगढ़' की तू मेरी हो नहीं सकती
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