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चाहा तुझे माँगू, फिर न सितारे टूटे
आँख भर आईं, दिल के किनारे टूटे
आँख भर आईं, दिल के किनारे टूटे
जिस की थी चाहत फ़क़त वो न मिला
देखे थे हमनें जो वो ख़्वाब हमारे टूटे
उस नदी ने अपना रस्ता बदल लिया
हम थे कोई सेहरा, जिस के सहारे टूटे
उस के लम्स में कोई जादू था यक़ीनन
हम भी तो उस शब इश्क़ में हारे, टूटे
तुम्हें भी अंदाज़ा हो ग़मनशीं होने का
कोई सानेहा तुम पे भी मेरे प्यारे टूटे
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बेमलतब की बातों पर इतना ग़ुस्सा ठीक नहीं
उदासी तो चल जाती है,लेकिन रोना ठीक नहीं
उदासी तो चल जाती है,लेकिन रोना ठीक नहीं
ख़ुशियाँ सारी खा जाएगी,दे जाएगी ढेरो ग़म
सोच के करना जब भी करना,प्यार वगैरा ठीक नहीं
आए वो और फूल पर बैठे , तुम उधेड़ दो पीठ
यार मेरे उस तितली को ऐसे बहकाना ठीक नहीं
उस ने मेरी नाव डुबोई, उस से ही सीखी तैराकी
मैं आख़िर ये कैसे कह दूँ कि वो दरिया ठीक नहीं
साथ तेरे रहते हैं लोग लेकिन करते नहीं मुहब्बत
या'नी लड़का ठीक तो है, लेकिन ज़्यादा ठीक नहीं
कब तक गैरों का ग़म, ढोवोगे काँधे पर 'ओम'
तुम को ही खा जाएगी ये, ऐसा करना ठीक नहीं
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तुम ने रोका नहीं है, अब चला जाऊँगा
ये धोखा नहीं है, अब चला जाऊँगा
ये धोखा नहीं है, अब चला जाऊँगा
तुम ने बताया नहीं इश्क़ है या नहीं
तुम ने सोचा नहीं है, अब चला जाऊँगा
मुहब्बत भी न करूँं और ठहर भी जाऊँ
ऐसा होता नहीं है, अब चला जाऊँगा
मेरे जाने से कौन सा तुम परेशाँ होंगे
तू तो रोता नहीं है, अब चला जाऊँगा
तुम कब तक शरीक-ए-ग़म रहोगे 'ओम'
तुम भी जाओ, मैं भी अब चला जाऊँगा
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