@nakulra821041
Nakul kumar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Nakul kumar's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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लोग तो बस जिस्मों पर बनवाते फिरते हैं लेकिन
तेरे नाम का टैटू मैंने दिल पर बनवाया था
शदीद उलझनें सब ख़्वाहिशें जला रही हैं
अजीब हाल है मेरा समझ नहीं आता
यूँ ज़िंदा रहना भी क्या कोई बेवक़ूफ़ी है या
कोई कमाल है मेरा समझ नहीं आता
मेरे हर ग़म मे वो इज़ाफ़ा दानिस्ता करती है
और ये काम भी वो आहिस्ता-आहिस्ता करती है
इस-कदर दिल सहे ज़द ठीक नहीं
इश्क़ की इतनी भी हद ठीक नहीं
बंद कमरे से निकल आ बाहर
दर्द की इतनी मदद ठीक नहीं
बंजर हूँ तो बंजर ही रहने दो मुझे
तुम अब मुझे कोई गुलिस्ताँ मत करो
तंग आ चुके हैं हम तेरे इस इश्क़ से
तुम छोड़ दो हमको परेशाँ मत करो
पहले याद आती हैं तो रोती हैं आँखें
फिर कहीं जा कर ज़रा सोती हैं आँखें
हर नज़र में क़ैद हैं मंज़र कई से
ख़्वाबों की लाशें फ़क़त ढोती हैं आँखें
मुंतज़िर हूँ मैं सहर का
रौशनी है तंग मेरी
एक मिट्टी का दिया हूँ
रात से हैं जंग मेरी
इस मोहब्बत में मेरी कुछ ऐसे बर्बादी हुई है
उसकी मेरी ही नज़र के सामने शादी हुई है
एक चेहरा मिरा दर्द-ए-दिल बन गया
ठीक था आदमी मुज़्महिल बन गया
इत्तिफ़ाक़न मैं गुज़रा था इक कूचे से
फिर गुज़रना ही वो मुस्तक़िल बन गया
मिरी बातों को वो आधा समझती हैं
मैं मतला कहता हूँ मक़्ता समझती हैं
हुनर हैं शायरी मैं शे'र कहता हूँ
मगर इसको तो वो ज़ाया समझती हैं
एक दिन बनेंगे खाक हम
मिट्टी की हैं खुराक हम
भीतर ख़लाए साथ है
बाहर से ठीक-ठाक हम