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कभी उतरा था आसमाँ मुझ में
खो गया जाने फिर कहाँ मुझ में
खो गया जाने फिर कहाँ मुझ में
जो कभी अपने घर नहीं लौटा
है उसी शख़्स का मकाँ मुझ में
मुझ को ज़िंदा कोई नहीं मिलता
रोज़-ओ-शब उठता है धुआँ मुझ में
सब ने देखा है मुझ में इक तालाब
कोई दरिया भी है रवाँ मुझ मैं
आज वो क़ीमती है इस जहाँ में
हो गया था जो राएगाँ मुझ में
ज़िंदगी काट दूँगा तन्हा मैं
इस गुमाँ का भी है गुमाँ मुझ में
मुझ से गुज़री थी इक बहार कभी
ठहरी है अब तलक ख़िज़ाँ मुझ में
आप की याद है बसी दिल में
रोज़ आती हैं तितलियाँ मुझ में
चीख़ता है कोई मेरे अंदर
या'नी अब मैं ही हूँ निहाँ मुझ में
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वो मिला है हम को सफ़र यहाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं
है ये रास्ता कोई बद-ग़ुमाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं
है ये रास्ता कोई बद-ग़ुमाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं
जो मोहब्बतों में नहीं रहे हैं जो नफ़रतों में शुमार हैं
बना है उन्हीं का ही कारवाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं
जहाँ चाँदनी में है तीरगी जहाँ सुब्ह से न हो रौशनी
रहे हम उसी सर-ए-आसमाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं
किसी बात पर न मलाल है न ही दिल में कोई सवाल है
तो ये दर्द कैसा है दरमियाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं
ये उदासियाँ सभी शाम की ये जो मुश्किलें हैं तमाम सी
दे रहे हैं हम कोई इम्तिहाँ जो मेरा नहीं जो तेरा नहीं
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याद थे जो रस्ते वो रस्ते ग़लत थे
सपनों पे चलते थे और सपने ग़लत थे
सपनों पे चलते थे और सपने ग़लत थे
अब समझ आता हैं उन को देख कर ये
फ़ैसलों में अपने हम कितने ग़लत थे
साथ उस के थे भरम वाले वो दिन थे
अच्छे थे वो दिन मगर वैसे ग़लत थे
दिल भी पागल हैं निभाता था मरासिम
दिल के अक्सर फ़ैसले होते ग़लत थे
अब मिला करते हैं मयखानों में वो लोग
जो कभी कहते कि मयख़ाने ग़लत थे
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